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कश्मीर मसले पर अलगाववादियों से भी होनी चाहिए बात : कांग्रेस
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Wed, 31 Aug 2016 11:38 AM IST
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गुलाम नवी आजाद
- फोटो : amar ujala
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राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि कश्मीर में अशांति के माहौल को समाप्त करने के लिए अलगाववादियों से भी बात की जानी चाहिए।
इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को बातचीत के लिए मुख्यधारा से अलग पार्टियों तथा पक्षकारों को चिह्नित करना चाहिए। वह पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संसद तथा सर्वदलीय बैठक दोनों में कहा था कि यदि सरकार जमीनी स्तर पर सुधार चाहती है तो जल्द से जल्द बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
इस वजह से बातचीत को केवल मुख्यधारा की पार्टियों तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। रियासत ही नहीं, बल्कि देशभर में मुख्यधारा से हटकर भी कुछ पार्टियां हैं, जिनका विधानसभाओं तथा संसद में प्रतिनिधित्व नहीं है।
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इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को बातचीत के लिए मुख्यधारा से अलग पार्टियों तथा पक्षकारों को चिह्नित करना चाहिए। वह पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संसद तथा सर्वदलीय बैठक दोनों में कहा था कि यदि सरकार जमीनी स्तर पर सुधार चाहती है तो जल्द से जल्द बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
इस वजह से बातचीत को केवल मुख्यधारा की पार्टियों तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। रियासत ही नहीं, बल्कि देशभर में मुख्यधारा से हटकर भी कुछ पार्टियां हैं, जिनका विधानसभाओं तथा संसद में प्रतिनिधित्व नहीं है।
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'1953 की स्थिति बहाल हो'
घाटी में हिंसा
- फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि कश्मीर के मामले में पाकिस्तान की भूमिका हमेशा से नकारात्मक रही है। यह कोई पहला मौका नहीं है। विभाजन के समय से ही ऐसा चला आ रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग के कारण ही सर्वदलीय समिति कश्मीर का दौरा करने आ रही है। सरकार ने इस दिशा में कोई भी पहल नहीं की है। कश्मीर में हालात बहुत पहले ही सामान्य हो सकते थे यदि सरकार ने बातचीत शुरू करने की मांग मान ली होती। उन्होंने कहा कि कश्मीर में पेलेट गन का लगातार इस्तेमाल विपक्ष के साथ विश्वासघात है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज ने 1953 की स्थिति बहाल करने की मांग की है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनरल परवेज मुशर्रफ के चार सूत्री फार्मूले पर भी विचार किया जाना चाहिए। यह फार्मूला पाकिस्तान के आंतरिक संकटों की वजह से फेल हुआ। इसे सभी पक्षकारों से बात कर सुलझाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग के कारण ही सर्वदलीय समिति कश्मीर का दौरा करने आ रही है। सरकार ने इस दिशा में कोई भी पहल नहीं की है। कश्मीर में हालात बहुत पहले ही सामान्य हो सकते थे यदि सरकार ने बातचीत शुरू करने की मांग मान ली होती। उन्होंने कहा कि कश्मीर में पेलेट गन का लगातार इस्तेमाल विपक्ष के साथ विश्वासघात है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज ने 1953 की स्थिति बहाल करने की मांग की है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनरल परवेज मुशर्रफ के चार सूत्री फार्मूले पर भी विचार किया जाना चाहिए। यह फार्मूला पाकिस्तान के आंतरिक संकटों की वजह से फेल हुआ। इसे सभी पक्षकारों से बात कर सुलझाया जा सकता है।