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जम्मू-कश्मीर: 12 वर्ष पूर्व नियुक्त 64 ड्रग इंस्पेक्टरों की चयन सूची रद्द, फिर होगा सभी का साक्षात्कार
Sat, 30 Oct 2021 12:00 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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Published by: Trainee Trainee
Updated Sat, 30 Oct 2021 12:00 AM IST
सार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जेकेएसएसबी ने इस मामले में नई चयन समिति का गठन कर नए सिरे से साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। सितंबर 2009 में जारी हुई थी चयन सूची।
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प्रतीकात्मक
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में बारह वर्ष पूर्व ड्रग इंस्पेक्टर के 64 पदों पर की गई भर्ती प्रक्रिया की चयन सूची को रद्द कर दिया है। चयन सूची को रद्द कर जेकेएसएसबी से नई चयन समिति का गठन कर नए सिरे से साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। पहले चयनित किए गए अभ्यर्थी कई वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे थे।
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हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के फैसले को भी पलट दिया। एकल पीठ ने चयनित अभ्यर्थियों की सेवाएं जारी रखने के साथ याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों को भी नियुक्त करने के आदेश दिए थे। यह भी आदेश दिया था कि यदि याची पक्ष के अभ्यर्थियों के लिए पद नहीं हैं तो चयन प्रक्रिया को नए सिरे से किया जाए।
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हाईकोर्ट ने पाया कि पांच मई 2008 को जेकेएसएसबी ने पदों के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन मांगे। 8 सितंबर 2009 को जेकेएसएसबी ने 64 पदों के लिए चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी कर दी। न्यायालय में चुनौती याचिका पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 18 दिसंबर 2015 को फैसले में कहा कि चयनित की सेवाएं जारी रखी जाएं और कोर्ट में याचिका दायर करने वाले योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्त किया जाए।
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इन आवेदकों के लिए पद न होने की सूरत में जेकेएसएसबी को पूरी सूची ही खारिज करनी होगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया देखने के बाद पता चलता है कि चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का निष्पक्ष और स्पष्ट आधार नहीं है। यह मामला मनमाफिक नियुक्तियों का है, जिसे आंशिक नहीं बल्कि पूरी तरह से अस्वीकार किया जाता है। चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में दिए गए अंकों समेत अन्य पहलुओं पर पारदर्शिता से समझौता किया गया है। लिहाजा पूरी सूची को खारिज कर जेकेएसएसबी को नई चयन समिति गठित कर साक्षात्कार आयोजित करने का आदेश दिया जाता है।
वर्षो से कार्यरत हैं सिर्फ इसलिए सेवाएं जारी नहीं रख सकते
कोर्ट ने कहा कि बिना आधार के नियुक्ति होने पर कर्मचारी की सेवाएं केवल इसलिए जारी नहीं रखी जा सकतीं कि वह कई वर्षों से सेवारत है। इस मामले में तर्क दिया गया था कि चयनित अभ्यर्थी सात वर्ष से सेवाएं दे रहे हैं।
18 साल बाद भी साबित नहीं कर पाए आरोप, तीन नशा तस्कर रिहा
जम्मू। लचर जांच की वजह से कुलगाम जिला कोर्ट को तीन नशा तस्करों को 18 साल के ट्रायल के बाद छोड़ना पड़ा। जज ताहिर खुर्शीद रैना ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रतिवादी पक्ष आरोपी बशीर अहमद, राशिद डार और अब्दुल गनी के खिलाफ उक्त मामले के आरोप साबित करने में असफल साबित हुआ है। 18 साल के बाद भी आरोप साबित नहीं हुए। उक्त तीनों आरोपियों को 2003 में भुक्की के साथ पकड़ा गया था। जेएनएफ