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न्यायिक अफसरों की सुरक्षा वापस न ली जाए

Fri, 22 May 2015 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 22 May 2015 12:58 AM IST
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securety of judicial officers not to be taken back

न्यायिक अफसरों की सुरक्षा वापस लेने के मामले में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मुख्य सचिव, डीजीपी, आईजीपी और एसएसपी जम्मू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए मुद्दों पर मामले की अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।

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रिपोर्ट में यह भी बताया जाए कि नंबर 2008 को फुल कोर्ट की ओर से जारी फैसले का अनुपालन कहां तक किया गया। इसमें कहा गया कि 2008 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में दस जजों की फुल बैठक में माना गया था कि न्यायिक अफसरों की सुरक्षा को लेकर अदालत सचेत है। फुल कोर्ट ने सरकार को सिफारिश की थी कि न्यायिक अफसर को ले जाने वाले वाहनों में लोगो जारी किया जाए।
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इसमें सीजेएम, न्यायिक मजिस्ट्रेट और जजों का विवरण हो। बहरहाल सरकार ने अब तक इस संबंध में कुछ नहीं किया, जबकि कुछ न्यायिक अफसरों को मिली सुरक्षा भी हटा ली। खंडपीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक न्यायिक अफसरों को मिले सुरक्षाकर्मी (भले वह पीएसओ हो) किसी भी सूरत में न हटाएं जाएं।
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याचिका में कहा गया कि प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट भी जिस तरह से अपनी ड्यूटी का निर्वाह करते हैं, उससे उन्हें धमकियां तक मिल सकती हैं। हत्या या बलात्कार के अलावा आर्म्स व एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों में वह रिमांड देते हैं। रियासत में कानून व्यवस्था की हालत बदतर है।


इससे न्यायिक अफसरों की सुरक्षा जरूरी हो जाती है। न्याय करने के लिए न्यायिक अफसरों को बिना डर के स्वतंत्र परिवेश चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो इसका असर न्यायिक मामलों पर पड़ेगा। जेएनएफ

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