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J&K: घाटी में दिखा बंद का असर, सात थाना क्षेत्र में लगी धारा 144

Sun, 21 Jan 2018 10:47 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जम्मू
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जम्मू Updated Sun, 21 Jan 2018 10:47 PM IST
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restriction in Old City of Srinagar, article 144 in 7 police station
बंद के दौरान तैनात जवान - फोटो : BASIT ZARGAR
अलगाववादियों की गावकदल में 28 साल पहले हुए नरसंहार के खिलाफ बंद का भरपूर असर रहा। दुकानें बंद रही और सार्वजनिक वाहन भी नहीं चले। हालांकि प्रशासन ने सात थाना क्षेत्र में धारा 144 लगा रखी थी। पुलिस ने अलगाववादियों का मार्च भी रोका। मृतकों को बसंत बाग स्थित एक मेरिज हाल में श्रद्धांजलि दी गई। 
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आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस ने सुरक्षा बलों ने 52 लोगों को मौत की घाट उतारने की घटना पर रविवार को घाटी के कई क्षेत्रों में बंद रहा। 21 जनवरी 1990 में हुई इस घटना में 250 लोग घायल हो गए। सुबह ही अलगाववादी नेताओं ने रैली निकालने का प्रयास किया।
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पुलिस ने पहले से ही खान्यार, रैनावाड़ी, नौहट्टा, सफाकदल, एमआर गुंज, मैसुमा और करानल खुड थाना क्षेत्र में धारा 144 लगा दी थी। जैसे ही अलगाववादी नेता जमा होने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने का भरपूर प्रयास किया। इन नेताओं ने मार्च निकालना शुरू किया। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के कारण मार्च विफल हो गया। किसी तरह से कुछ लोग बसंत बाग तक पहुंचने में सफल रहे। 
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बसंत बाग में दी गई श्रद्धांजलि

बसंत बाग में हुर्रियत कांफ्रेस के नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक ने मृतकों को श्रद्धांजलि भेंट की। इस बीच, शुक्रवार को हिरासत में लिए यासीन मलिक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज पहले से ही घर में नजर बंद हैं।

उन्हें केवल श्रद्धांजलि के लिए बसंत आग तक लाया गया। इन नेताओं ने इस दौरान कहा केंद्र की तत्कालीन सरकार के साजिश के कारण कश्मीरी पंडितों को भी घाटी से पलायन कराया गया। घटना एक साजिश के तहत कराई गई। कश्मीर में यह पहला नरसंहार था, जबकि लोग स्वशासन की मांग कर रहे थे।

लोगों के पास अधिकार है कि वह अपनी आवाज को बुलंद कर सकें। बंद पूरी सिविल लाइन और अन्य क्षेत्रों में भी रखा जाएगा। दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे। मारे गए लोगों को याद किया गया जाएगा। 
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