श्री माता वैष्णो देवी को विश्राम देने के लिए विधानसभा में लाया गया प्रस्ताव
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श्री माता वैष्णो देवी क ो विश्राम देने के प्रस्ताव को सत्ता पक्ष की आपत्ति और धार्मिक मामलों को सदन के दखल से दूर रखने के तर्क पर खारिज कर दिया गया। नतीजतन कांग्रेस विधायक जुगल किशोर को अपना प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। विधायक ने सदन में पेश किए प्रस्ताव में श्री माता वैष्णो देवी को दो दफा विश्राम देने की व्यवस्था सुझाई थी।
उन्होंने तर्क दिया बावे वाली माता मंदिर, रघुनाथ मंदिर, नौ देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश, तिरुपति बालाजी, श्री केदारनाथ मंदिर सहित कई अन्य मंदिरों में देवी-देवताओं को विश्राम देने की व्यवस्था है। उन्होंने दावा किया कि शास्त्रों में देवी-देवताओं को विश्राम दिए जाने का जिक्र है, जिसका श्राइन बोर्ड अनुसरण नहीं कर रहा।
देवी-देवताओं को विश्राम और सोने के लिए समय दिया जाना चाहिए। प्रस्ताव का विरोध करते हुए पर्यटन विकास मंत्री प्रिया सेठी ने कहा कि प्रस्ताव में सुझाया गया मामला पूरी तरह से धर्म और विश्वास से जुड़ा हुआ है, जिस पर सदन में चर्चा करना सही नहीं होगा। स्थापित परंपरा में दखल देना सदन के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
भगवान सोने चले गए तो उन्हें जगाने का निर्णय हम नहीं ले सकते
पीडीपी विधायक सुरिंदर चौधरी ने प्रस्ताव पर कहा कि यदि भगवान सोने चले गए तो उन्हें जगाने का निर्णय हम नहीं ले सकते। जुगल किशोर शर्मा को मठ अथवा शंकराचार्य जाकर इस समस्या का समाधान खोजना चाहिए। उन्होंने कहा श्री माता वैष्णो देवी दर्शनार्थियों की संख्या इतनी अधिक है कि एक घंटे के लिए भी मंदिर को बंद किया जाता है तो अव्यवस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा।
भाजपा विधायक सुरिंदर मोहन अंबरदार ने जुगल किशोर शर्मा को विषय पर किसी अधिकृत व्यक्ति की राय लेने का सुझाव दिया। मंत्री प्रिया सेठी ने कहा कि सरकार ने इस विषय को लेकर जानकारों की राय ली है। श्री माता वैष्णो देवी दर्शन की परंपरा प्राचीन है। ऐसा कोई दस्तावेज या फिर जिक्र भी नहीं मिला है, जिसमें देवी-देवताओं को दिन या शयनकाल में विश्राम देने की बात की गई हो।