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शोध: प्रदेश में होगी फालसा की खेती, फल से कंपनियां बनाएंगी दवा, शूगर के इलाज के बताया जाता है कारगर 

Thu, 10 Feb 2022 04:06 PM IST
विमल शर्मा सतीश वालिया
सतीश वालिया Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 10 Feb 2022 04:06 PM IST
सार

आईआईआईएम-सीएसआईआर ने फालसा पर किया है शोध। इस बरसात में किसानों को लगाने के लिए दिए जाएंगे पौधे। दवा कंपनियों को बेचा जाएगा का इसका फल। शूगर के इलाज में रामबाण है यह औषधीय पौधा। 
 

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Research: Falsa will be cultivated in the state, companies will make medicine from the fruit
phalsa fruit - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में अब फालसा फल की खेती की जाएगी। आईआईआईएम-सीएसआईआर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटेग्रेटिव मेडिसिन, काउंसिल ऑफ सांइटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च जम्मू) में इस पर शोध किया गया है। शूगर समेत कई बीमारियों के इलाज में यह फल रामबाण बताया गया है। लगातार सेवन करने से यह फल शूगर को बढ़ने से रोकता है। साथ ही शूगर से होने वाले रोगों को भी ठीक करता है।

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इसका अब दवा निर्माण पर भी इस्तेमाल किया जाएगा, जो शूगर के लिए भी लाभदायक होगी।  शोध के बाद इस पर स्कॉस्ट जम्मू ने ट्रायल किया है। ट्रायल के बाद अच्छी पैदावार पाई गई है। अब आने वाली बरसात में पौधे किसानों को वितरित किए जाएंगे। जहां पर कम बारिश होती है। वहां पर खेती की जा सकती है।
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जम्मू संभाग में जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, रियासी समेत अन्य जिलों में अपार संभावनाएं हैं। स्कॉस्ट जम्मू के अनुसार संभाग में खेती की अपार संभावनाएं हैं। बरसात के दौरान पौधा लगाया जा सकता है। दो साल में पौधा तैयार होता है।
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फलों को दवा कंपनियों के माध्यम से बेचा जाएगा। इससे आय में भी इजाफा होगा। प्रति किलो पांच सौ रुपये के हिसाब से बेचा जाएगा। मौजूदा समय में स्कॉस्ट जम्मू में ही ट्रायल बेस पर फालसा फल उगाया गया है। ट्रायल सफल रहा है। इस बार खेती करने के लिए जागरूक किया जाएगा। 
 
घर में भी लोग लगा सकते हैं पौधे  
फालसा फल एंटी आक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है। इसका शरबत भी बनता है। इसके अलावा खून की कमी, पेशाब रोग, पेट रोग, चरम रोग, लू लगने पर इसका सेवन अति उत्तम है। इसके अलावा पत्ते रगड़ कर लगाने से घाव जल्द ठीक होता है। लोग घरों में भी पौधे उगाकर बीमारी के हिसाब से सेवन कर सकते हैं। फल को सीधा या फिर शरबत बनाकर पिया जा सकता हे। 


 

फालसा की खेती के लिए जम्मू संभाग में मौसम अनुकूल है। यहां पर बारिश कम होती है। इसलिए इसकी पैदावार ज्यादा होती है। दो साल में फल देने लगता है। दवा कंपनी को फल बेचे जाएंगे। आईआईएम में शोध किया गया है। यह शूगर समेत अन्य बीमारियों के लिए रामबाण है। अब इसकी खेती की जाएगी। 
- प्रशांत बख्शी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बागवानी विभाग स्कॉस्ट जम्मू

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