19 हजार पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
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कश्मीर में कुदरत का कहर बरपना अभी बंद नहीं हुआ है। चारों ओर तबाही का आलम है। बाढ़ प्रभाव अब हर कसबे और हर गांव में नजर आने लगा है। सरकारी बचाव कार्य भी कुदरत के कहर के सामने बौना साबित हो रहा है। मूसलाधार बारिश अभी जारी है।
अगर मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर भरोसा किया जाए तो रविवार सुबह से मौसम में सुधार होने की संभावना है। सरकारी जानकारी के अनुसार, 400 के करीब गांव पानी में डूबे हैं, 1225 गांवों पर आंशिक असर हुआ है, 50 पुल बहे हैं और सैकड़ों मकान ढह गए हैं। कश्मीर संभाग में मरने वालों की संख्या 12 तक पहुंच गई है।
कश्मीर में सेना, पुलिस तथा नागरिक प्रशासन के अलावा राष्ट्रीय और राज्य प्रबंधन की टीमें भी राहत कार्यों में जुट गई हैं। दिल्ली से कल भेजी गई राष्ट्रीय प्रबंधन के दलों ने शनिवार को बचाव कार्य शुरू कर दिया। उनको श्रीनगर के अधिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में भेज दिया गया है।
सेना कर रही प्रभावितों के खाने-पीने की व्यवस्था
सेना का मिशन सहायता बचाव कार्यक्रम शनिवार को भी जारी रहा। हालांकि इस दौरान उसकी एक नौका पानी के तेज बहाव में बह गई, लेकिन उसके काम में कोई कमी नहीं आई। समूचे कश्मीर संभाग में उसके कई दल लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।
सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, इस अभियान में सेना के 70 कालम और इंजीनियर की 13 टीमें शामिल हैं। उनको कई दलों में बांटा गया है जो लोगों को मौत के मुंह से बचा कर सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ उनका पूरा तालमेल है। सेना सैकड़ों लोगों को तंबू उपलब्ध करवा चुकी है। कुछ जगहों पर उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई है।
खराब मौसम के चलते राहत कार्य धीमा
सेना के दल अब तक 19,000 से भी अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज चुके हैं और यह अभियान अभी जारी है। उन्होंने बताया कि सेना के हेलीकाप्टर भी इस अभियान में शामिल होने के लिए तैयार हैं, लेकिन खराब मौसम उनको ऐसा करने से रोक रहा है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने शनिवार शाम श्रीनगर में बताया कि बाढ़ के कारण अभी भी करीब 400 गांव पानी में डूबे हुए हैं, जबकि करीब 1200 गांव आंशिक तौर पर प्रभावित हुए हैं। इस दौरान लगभग 50 पुल बह गए हैं और सैकड़ों मकान भी ढह गए हैं।
उन्होंने कहा कि अब तक सरकारी तौर पर मरने वालों की संख्या 11 है और यह बढ़ भी सकती है। उनका कहना था कि अधिकतर इलाकों में संर्पक साध पाना कठिन हो रहा है, इसलिए पूरे आंकड़े उपलब्ध करवा पाना अभी कठिन हो रहा है।
सभी पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले रास्ते बंद
कश्मीर के सभी प्रख्यात पर्यटन स्थलों का संर्पक अन्य भागों से टूट गया है। भारी बारिश के चलते पैदा हुई बाढ़ की स्थिति से ऐसा हुआ है। एक सरकारी जानकारी के अनुसार, मागम तथा गुलमर्ग के बीच कई जगहों पर पानी आ जाने से इस मार्ग को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम पर्यटन स्थल का रास्ता भी लिद्दर नदी के उफान पर होने से बंद कर देना पड़ा है। नदी का पानी कई गांवों में भी घुस गया है। गांदरबल जिले के सोनामर्ग की ओर जाने वाला मार्ग भी कई स्थानों पर सड़क के बह जाने तथा भूस्खलन के कारण बंद कर दिया गया है।
ढाई हजार गांवों में बाढ़ का कहर : उमर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि रियासत में 50 साल में ऐसी बाढ़ नहीं आई थी। ढाई हजार से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कई स्थानों पर प्रशासन की टीमें पहुंच नहीं पा रहीं हैं। सड़कें कट गई हैं और पुल बह गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है। क्षति का आकलन अभी नहीं किया जा सकता।
केंद्र सरकार ने पैसे की कमी नहीं होने देने के लिए आश्वस्त किया है। आपदा राहत कोष के एक हजार करोड़ रुपये में से अभी खर्च किए जा रहे हैं। बिजली और पेयजल की सप्लाई भी कई इलाकों में प्रभावित हुई है। इसे सुचारु किए जाने में वक्त लग सकता है। अपने आवास पर एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उमर ने कहा कि मृतकों की संख्या 100 से अधिक है और इसमें और इजाफा हो रहा है।
रियासी में मकान गिरने से कई लोग दब गए हैं। मौसम की खराबी और संपर्क कटने के कारण दक्षिणी कश्मीर के कई इलाकों में राहत नहीं पहुंचाई जा सकी है। राहत टीमें वहां पहुंच नहीं पा रहीं हैं। अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा के इलाके कटे हैं। राजोरी और पुंछ के इलाकों में भी राहत टीमें नहीं पहुंच पा रहीं हैं। कश्मीर में 1025 गांव प्रभावित हैं जिनमें से 300 बाढ़ में डूबे हैं।
जम्मू संभाग में 1110 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। जानमाल को भारी नुकसान हुआ है। खेत तबाह हो गए हैं और फलों की फसल चौपट हो गई है। एनडीआरएफ और सेना राहत में जुटी है। प्रशासन की पूरी टीम लगी है। सरकार लगातार मानिटरिंग कर रही है। उन्होंने कहा कि वह खुद पीड़ित इलाकों का दौरा कर हालात की समीक्षा कर रहे हैं।