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Jammu News: अज्ञान की दृष्टि से ही बने धर्म के दायरे, सद्गुरु की शरण में मानव जाने की जरूरत
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कथा का वाचन करते स्वामी सुकर्मानंद व अन्य
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नव दुर्गा मंदिर कमेटी शक्ति नगर ने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में शुक्रवार को श्री हरि कथा का आयोजन किया। आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी सुकर्मानंद ने प्रभु श्री हरि की महिमा का रसपान करवाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्री हरि की पावन कथा रूपी गंगा में गोता लगाता है, वह कर्म-संस्कारों की कालिमा से स्वयं को पवित्र बना लेता है। श्री हरि को प्राप्त करने के लिए मन में श्रद्धा आवश्यक है।
आगे कहा कि अज्ञान की दृष्टि के कारण मानव में धर्म को लेकर दायरे बन चुके हैं। इसके लिए आवश्यकता है सद्गुरु की शरण में उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त करने की, जिसके माध्यम से हम एक निराकार शक्ति, ज्योति स्वरूप परमात्मा का साक्षात्कार कर पाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम को जान कर ही राम राज्य की स्थापना में सहयोग कर सकते हैं, क्योंकि जब तक प्रभु श्री राम जी को न जाना, ह्रदय आसन पर न बिठाया, तब तक हमारे भीतर रावण जैसी प्रवृत्ति आतंक मचाती रहेगी।
उन्होंने कहा कि दशरथ और दशानन दोनों के जीवन में एक समानता है। दोनों के नाम में दश लगा है। दोनों का जीवन रूपी रथ दश इन्द्रियों से निर्मित है, पर दशरथ ने जीवन रूपी रथ को प्रभु को सौंप दिया और दशानन रावण ने विकारों के अधीन किया। आज युवाओं के मन में उठने वाली कामनाओं, वासनाओं के कारण समाज में नारी शोषण जैसी घटनाओं का स्तर बढ़ता चला जा रहा है।
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स्वामी हरिदासानंद, स्वामी सुचेतानंद, महात्मा रमन दीप, दीप सहगल साध्वी ने सुमधुर भजनों को गाकर प्रभु की मंगल पावन आरती के साथ श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। विशेष तौर पर मंदिर कमेटी के प्रधान एवं अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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जम्मू। नव दुर्गा मंदिर कमेटी शक्ति नगर ने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में शुक्रवार को श्री हरि कथा का आयोजन किया। आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी सुकर्मानंद ने प्रभु श्री हरि की महिमा का रसपान करवाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्री हरि की पावन कथा रूपी गंगा में गोता लगाता है, वह कर्म-संस्कारों की कालिमा से स्वयं को पवित्र बना लेता है। श्री हरि को प्राप्त करने के लिए मन में श्रद्धा आवश्यक है।
आगे कहा कि अज्ञान की दृष्टि के कारण मानव में धर्म को लेकर दायरे बन चुके हैं। इसके लिए आवश्यकता है सद्गुरु की शरण में उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त करने की, जिसके माध्यम से हम एक निराकार शक्ति, ज्योति स्वरूप परमात्मा का साक्षात्कार कर पाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम को जान कर ही राम राज्य की स्थापना में सहयोग कर सकते हैं, क्योंकि जब तक प्रभु श्री राम जी को न जाना, ह्रदय आसन पर न बिठाया, तब तक हमारे भीतर रावण जैसी प्रवृत्ति आतंक मचाती रहेगी।
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उन्होंने कहा कि दशरथ और दशानन दोनों के जीवन में एक समानता है। दोनों के नाम में दश लगा है। दोनों का जीवन रूपी रथ दश इन्द्रियों से निर्मित है, पर दशरथ ने जीवन रूपी रथ को प्रभु को सौंप दिया और दशानन रावण ने विकारों के अधीन किया। आज युवाओं के मन में उठने वाली कामनाओं, वासनाओं के कारण समाज में नारी शोषण जैसी घटनाओं का स्तर बढ़ता चला जा रहा है।
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स्वामी हरिदासानंद, स्वामी सुचेतानंद, महात्मा रमन दीप, दीप सहगल साध्वी ने सुमधुर भजनों को गाकर प्रभु की मंगल पावन आरती के साथ श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। विशेष तौर पर मंदिर कमेटी के प्रधान एवं अन्य सदस्य मौजूद रहे।