रेड कारपेट पर चलकर किया गया मतदान
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देश के अधिकांश हिस्सों में मतदान के दौरान अक्सर पोलिंग बूथ के नाम पर किसी स्कूल के अव्यवस्थित कमरे की शक्ल उभर कर सामने आती है। जहां एक कोने में कार्डबोर्ड से घिरे टेबल पर ईवीएम रखी होती है। लोग लंबी कतार में खड़े होकर किसी तरह अपने मताधिकार का प्रयोग करते नजर आते हैं।
लेकिन, इस बार कई स्थानों पर बने मतदान केंद्रों की सजावट देख मतदाताओं को भ्रम हो रहा है कि वे किसी विवाह समारोह में गलती से तो नहीं पहुंच गए। कुछ ऐसा नजारा ज्यौड़ियां स्थित माडल मतदान केंद्र में नजर आया, जहां की सजावट देख हर कोई एक बार दंग हो रहा था।
अक्सर किसी बड़ी शख्सियत के सम्मान में रेड कारपेट बिछाया जाता है। रेड कारपेट पर चलना गर्व की बात मानी जाती है। लेकिन, इस बार चुनाव आयोग ने ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं के लिए रेड कारपेट बिछाकर एक अनोखी पहल की है।
इससे पहले नहीं देखी ऐसी व्यवस्था
ज्यौड़ियां के माडल पोलिंग बूथ पर अपनी बुजुर्ग पत्नी के साथ मतदान करने पहुंचे किसान अशोक शर्मा रेड कारपेट वाला मतदान केंद्र देख कुछ झिझके। सुरक्षाकर्मी द्वारा उनकी मतदाता पर्ची देख उन्हें जब रेड कारपेट वाले पंडाल की ओर जाने के लिए इशारा किया गया, तो वह इधर-उधर देखने लगे। अशोक शर्मा के अनुसार पिछले 40 साल से वोट डालते आ रहे हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी।
खास बात यह थी कि पंडाल में मतदाता के घुसते ही ट्रे में चाय पहुंच रही थी। लाइन में लगने की जरूरत नहीं। कुर्सी पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कीजिए। इसके अलावा विकलांगों के लिए भी आधुनिक व्हील चेयर के साथ स्टाफ मौजूद।
खासकर ग्रामीण इलाकों में मतदाता की इतनी आवभगत कभी देखने को नहीं मिली। जम्मू शहर के पाश इलाके गांधी नगर और शास्त्री नगर में भी माडल पोलिंग बूथ बनाए गए, लेकिन रेड कारपेट वाला ज्यौड़ियां का पोलिंग बूथ तमाम मतदान केंद्रों को मात दे रहा था। एक मतदाता का कहना था कि ऐसे पोलिंग बूथ बने और मतदाताओं को असुविधा न हो, तो हर शख्स मतदान के लिए निकलेगा।
एलओसी के पास मतदान केंद्र पर मेला
लाइन आफ कंट्रोल (एलओसी) के पास स्थित छंब विधानसभा क्षेत्र में दिनभर मेला लगा रहा। पीओके से मात्र दो किलोमीटर दूर स्थित सरकारी स्कूल में बने पोलिंग बूथों पर सुबह से ही लोगों का जमघट लगा रहा। पुरुषों के अलावा महिलाओं में भी मतदान के प्रति जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
लोग बच्चों को लेकर लंबी लाइनों में खड़े नजर आए। जानकारों के अनुसार 1965 के युद्ध के बाद छंब इलाके का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चला गया। यदि वह इलाका इस विधानसभा क्षेत्र में होता तो मतदाताओं की संख्या इसके दोगुनी होती।