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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Reasi Lashkar Terrorist: Villagers caught terrorists for the second time in seven years

Reasi Lashkar Terrorist: सात साल में दूसरी बार ग्रामीणों ने पकड़े आतंकी, पीर पंजाल में दहशतगर्दी के लिए अब जगह नहीं

Mon, 04 Jul 2022 03:04 AM IST
विमल शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 04 Jul 2022 03:04 AM IST
सार

रियासी में लोगों ने दिलेरी दिखाते हुए दो आतंकियों को पकड़ा लिया। खुलासा होने पर पता चला है कि एक आतंकी लश्कर का सरगना था। इस घटना से पहले भी लोगों ने उधमपुर में आतंकियों को पकड़ा था।

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Reasi Lashkar Terrorist: Villagers caught terrorists for the second time in seven years
रियासी में पकड़ा गया आतंकी तालिब हुसैन सुरक्षाबलों की हिरासत में - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू संभाग में ग्रामीणों ने दिलेरी दिखाते हुए सात साल में दूसरी बार दो आतंकियों को दबोच कर पीर पंजाल इलाके में आतंकवाद को दोबारा पुनर्जीवित करने की पाकिस्तान की साजिश को नाकाम कर दिया है। ग्रामीणों ने यह भी जता दिया है कि यहां की जमीन पर आतंकवाद और आतंकी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। इससे पूर्व 2015 में उधमपुर के नरसू में बीएसएफ के काफिले पर हमला करने वाले पाकिस्तानी आतंकी नावेद को भी ग्रामीणों ने दबोचा था। रिश्ते में सगे जीजा-साले को इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से वीरता पुरस्कार भी दिया गया। 

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 पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नावेद को जिंदा पकड़ा था

करीब सात साल पहले 2015 में उधमपुर के नरसू इलाके में दो ग्रामीणों ने पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नावेद को जिंदा पकड़ा था। इसके लिए 2016 में दोनों को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में आयोजित समारोह में सम्मानित किया था। पांच अगस्त 2015 को बीएसएफ  के काफि ले की बस पर उधमपुर के नरसू नाले के पास आतंकियों ने हमला कर दिया था। मौके पर एक आतंकी मार गिराया गया था, जबकि बीएसएफ कांस्टेबल रॉकी शहीद हो गया था। इस हमले में शामिल पाकिस्तानी आतंकी नावेद मौके से भाग निकला।

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जीजा-साले राकेश और बिक्रमजीत आतंकी नावेद से भिड़ गए

उसने पांच लोगों को बंधक बनाया और जंगलों में निकल गया। इस दौरान रिश्ते में जीजा-साले राकेश और बिक्रमजीत आतंकी नावेद से भिड़ गए। उनमें से एक ने आतंकी के पास मौजूद एके-47 के ट्रिगर में उंगली फं सा दी ताकि वह गोली न चला सके। दूसरे ने पैर से उसे काबू में रखा और उसकी गर्दन पकड़ ली। आतंकी नावेद ने उनके कब्जे से छूटने के लिए उन्हें काट भी खाया, फिर भी दोनों ने हार नहीं मानी और आतंकी को काबू में रखा। बाद में सुरक्षाबलों के पहुंचने पर उन्होंने आतंकी को उनके हवाले किया। 

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ग्रामीणों का सीना गर्व से चौड़ा, बोले-किसी बात की न तो चिंता और न डर

लश्कर आतंकियों तालिब हुसैन और फैसल अहमद डार को पकड़ने वाले ग्रामीणों का सीना गर्व से चौड़ा है। उनका कहना है कि उन्हें किसी बात की न तो चिंता है और न डर। उन्हें बस इतनी फिक्र है कि इलाके में दोबारा आतंकवाद जीवित न होने पाए। बड़ी मुश्किल से इलाका आतंकवाद मुक्त हो पाया है। अब इसे यहां पैर पसारने नहीं दिया जाएगा ताकि युवाओं का भविष्य बर्बाद न होने पाए। उन्होंने राजोरी व रियासी के बॉर्डर वाले टुकसन ढोक इलाके में दोबारा से सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि इससे इलाके में दहशतगर्दों को सिर उठाने का मौका नहीं मिल सकेगा। 

डंडों-कुल्हाड़ी से मार गिराए थे आतंकी, तब बनी थी वीडीसी

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद का कहना है कि ग्रामीणों ने बहादुरी का परिचय दिया है। उन्होंने यह दिखा दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में वे साथ हैं। किसी भी सूरत में दहशतगर्दों को पनाह नहीं दी जाएगी। टुकसन ढोक के ग्रामीणों की बहादुरी से जम्मू संभाग में संदेश जाएगा। रियासी में ग्रामीणों की बहादुरी का पुराना किस्सा साझा करते हुए डॉ. वैद ने कहा कि 1995 में निहत्थे ग्रामीणों ने आतंकियों से मोर्चा ले लिया था।

ग्रामीणों को हथियार मुहैया कराए थे

कुल्हाड़ी और डंडों से दो आतंकियों को मार गिराया था। ग्रामीणों ने आतंकियों से मोर्चा लेने के लिए हथियार मुहैया कराने की मांग की थी। तब वे एसएसपी थे। उन्होंने इस घटना के बाद पहली गांव सुरक्षा समिति (विलेज डिफेंस कमेटी) का गठन किया था और ग्रामीणों को हथियार मुहैया कराए थे। इसके बाद यह पूरे प्रदेश में लागू किया गया।

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