{"_id":"5ca66d88bdec2260e22ad52f","slug":"reaction-on-two-day-movement-of-army-on-the-highway","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हाईवे पर दो दिन सेना की मूवमेंट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं, वापस लेने की रखी मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईवे पर दो दिन सेना की मूवमेंट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं, वापस लेने की रखी मांग
Fri, 05 Apr 2019 02:18 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 05 Apr 2019 02:18 AM IST
विज्ञापन
सेना का काफिला
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर घाटी को जम्मू के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने तक सप्ताह में दो दिन सिविलियन मूवमेंट पर लगाए गए प्रतिबंध पर घाटी के लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं सहित आम जनता इस फैसले के खिलाफ है। उनकी मांग है कि राज्यपाल प्रशासन इस फैसले पर गौर कर इसे जल्द से जल्द वापस ले।
हाईवे पर सेना की मूवमेंट पर जहां एक ओर राजनेताओं द्वारा दिए गए बयानो में इसे कश्मीर की जनता के साथ नाइंसाफ ठहराया गया है, वहीं सोशल मीडिया पर भी कश्मीर की जनता इस फैसले की निंदा कर रही है।
उनका कहना है कि इस फैसले से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मीर फरीद नाम के एक स्थानीय ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, बुधवार और रविवार को केवल सेना को चलने की अनुमति... क्या हमारे यहां जंग का माहौल है ? ... क्या स्थानीय लोगों को तकलीफ पहुंचाना आतंकवाद के साथ निपटने का नया मंत्र है ? ... या फिर कार बम के सामने सरकार ने घुटने टेक दिए हैं ? क्या यह लोकतंत्र नहीं ? वहीं एक अन्य स्थानीय समीर शौकीन ने लिखा, मैं अगले रविवार अपने घर लौट रहा हूं ... तो मैं एयरपोर्ट से शोपियां कैसे जाऊंगा, क्योंकि राजमार्ग पर चलने की अनुमति तो नहीं होगी ?
विज्ञापन
विज्ञापन
क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं सहित आम जनता इस फैसले के खिलाफ है। उनकी मांग है कि राज्यपाल प्रशासन इस फैसले पर गौर कर इसे जल्द से जल्द वापस ले।
हाईवे पर सेना की मूवमेंट पर जहां एक ओर राजनेताओं द्वारा दिए गए बयानो में इसे कश्मीर की जनता के साथ नाइंसाफ ठहराया गया है, वहीं सोशल मीडिया पर भी कश्मीर की जनता इस फैसले की निंदा कर रही है।
विज्ञापन
उनका कहना है कि इस फैसले से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मीर फरीद नाम के एक स्थानीय ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, बुधवार और रविवार को केवल सेना को चलने की अनुमति... क्या हमारे यहां जंग का माहौल है ? ... क्या स्थानीय लोगों को तकलीफ पहुंचाना आतंकवाद के साथ निपटने का नया मंत्र है ? ... या फिर कार बम के सामने सरकार ने घुटने टेक दिए हैं ? क्या यह लोकतंत्र नहीं ? वहीं एक अन्य स्थानीय समीर शौकीन ने लिखा, मैं अगले रविवार अपने घर लौट रहा हूं ... तो मैं एयरपोर्ट से शोपियां कैसे जाऊंगा, क्योंकि राजमार्ग पर चलने की अनुमति तो नहीं होगी ?
विज्ञापन
गौरतलब है कि होम सेक्र्रेटरी शालीन काबरा द्वारा जारी किए गए ऑर्डर के अनुसार 31 मई तक 271 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग पर जम्मू से बारामुला तक बुधवार और रविवार को सुबह 4 से शाम 5 बजे तक किसी भी सिविल मूवमेंट को चलने की अनुमति नहीं होगी। बता दें कि यह निर्देश पुलवामा आत्मघाती हमले और हाल ही में बनिहाल में कार विस्फोट के बाद जारी किया गया है।
खुदा के वास्ते यह क्या हो रहा है ? क्या कश्मीर को ब्रिटिश की कॉलोनी की तरह बनाना चाहते हैं ? यह राज्यपाल सत्यपाल मलिक के नेतृत्व वाली हुकूमत का एक नागरिक के मौलिक अधिकारों के साथ हस्तक्षेप वाला फैसला है। कारगिल युद्ध के दौरान भी हाईवे बंद नहीं हुआ था। जब खुफिया रिपोर्टों ने बताया था कि आत्मघाती हमलावर बड़े पैमाने पर हैं।
-डॉ. फारूक अब्दुल्ला
2014 से पहले कभी हाईवे क्यों नहीं बंद हुआ? क्योंकि हम इसकी इजाजत नहीं देते थे। आज हम अपनी सड़कों के मालिक नहीं हैं। हफ्ते में दो दिन हमारा हाईवे बंध होगा... नया ऑर्डर... तुगलकी फरमान। किसी ने नहीं सोचा कि हमारे मरीजों को जब अस्पताल जाना होगा तो कैसे जाएंगे। क्या किसी मरीज को श्रीनगर जाना होगा किस रास्ते से जाएंगे, क्या मोदी साहब हेलीकाप्टर भेजेंगे उनके लिए। तभी मैं कहता हूं कि इन ताकतों से बचें, जिन्होंने रियासत में आज यह हाल कर दिया कि हम अपनी ही सड़कों पर चलने के लायक नहीं रहे। इस हद तक इस रियासत का बेड़ा गर्क किया है। राज्यपाल से गुजारिश करूंगा कि इस पर दुबारा विचार किया जाए।
-उमर अब्दुल्ला
खुदा के वास्ते यह क्या हो रहा है ? क्या कश्मीर को ब्रिटिश की कॉलोनी की तरह बनाना चाहते हैं ? यह राज्यपाल सत्यपाल मलिक के नेतृत्व वाली हुकूमत का एक नागरिक के मौलिक अधिकारों के साथ हस्तक्षेप वाला फैसला है। कारगिल युद्ध के दौरान भी हाईवे बंद नहीं हुआ था। जब खुफिया रिपोर्टों ने बताया था कि आत्मघाती हमलावर बड़े पैमाने पर हैं।
-डॉ. फारूक अब्दुल्ला
2014 से पहले कभी हाईवे क्यों नहीं बंद हुआ? क्योंकि हम इसकी इजाजत नहीं देते थे। आज हम अपनी सड़कों के मालिक नहीं हैं। हफ्ते में दो दिन हमारा हाईवे बंध होगा... नया ऑर्डर... तुगलकी फरमान। किसी ने नहीं सोचा कि हमारे मरीजों को जब अस्पताल जाना होगा तो कैसे जाएंगे। क्या किसी मरीज को श्रीनगर जाना होगा किस रास्ते से जाएंगे, क्या मोदी साहब हेलीकाप्टर भेजेंगे उनके लिए। तभी मैं कहता हूं कि इन ताकतों से बचें, जिन्होंने रियासत में आज यह हाल कर दिया कि हम अपनी ही सड़कों पर चलने के लायक नहीं रहे। इस हद तक इस रियासत का बेड़ा गर्क किया है। राज्यपाल से गुजारिश करूंगा कि इस पर दुबारा विचार किया जाए।
-उमर अब्दुल्ला
दमन की बात आती है, तो कश्मीर के प्रति जीओआई का वर्तमान दृष्टिकोण केवल सुसंगत रहा है। कश्मीरियों का सफाया करें, उन्हें जेलों में डालें, उन्हें मूल अधिकारों से वंचित करें और उन्हें पीड़ित करें। वे केवल कश्मीर चाहते हैं। ऐसा हम होने नहीं देंगे। जैसे हम जमात के खिलाफ लगाए प्रतिबंध के खिलाफ सड़कों पर आए वैसे ही इसके खिलाफ भी सड़कों पर आकर लड़ेंगे। यह तानाशाही नहीं चलेगी। सड़कों पर खाली सेना चलेगी इसका फैसला करने वाले आप कोई नहीं होते।
-महबूबा मुफ़्ती
हर हफ्ते दो दिन के लिए राजमार्ग बंद करने से जम्मू और कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी परिणाम होंगे। कश्मीर के पास केवल सड़क मार्ग है न रेल सेवा न कुछ और। हवाई किराए की तो बात ही न करें। एवीएशन मंत्रालय की गलत नीतियों के कारण पहले ही आसमान छू रहे हैं।
-केसीसीआई
यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है, जिसे वापस लेना चाहिए। सप्ताह में दो बार राजमार्ग पर सिविलियन मूवमेंट को रोकना नागरिकों के लिए अराजकता वाली स्थिति उत्पन्न करेगा। मैं सरकार से कहना चाहता हू इस पर गंभीरता से गौर करें।
-जीए मीर
-महबूबा मुफ़्ती
हर हफ्ते दो दिन के लिए राजमार्ग बंद करने से जम्मू और कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी परिणाम होंगे। कश्मीर के पास केवल सड़क मार्ग है न रेल सेवा न कुछ और। हवाई किराए की तो बात ही न करें। एवीएशन मंत्रालय की गलत नीतियों के कारण पहले ही आसमान छू रहे हैं।
-केसीसीआई
यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है, जिसे वापस लेना चाहिए। सप्ताह में दो बार राजमार्ग पर सिविलियन मूवमेंट को रोकना नागरिकों के लिए अराजकता वाली स्थिति उत्पन्न करेगा। मैं सरकार से कहना चाहता हू इस पर गंभीरता से गौर करें।
-जीए मीर
यह सरकार का एक और जनता विरोधी और तानाशाही कदम है। दो दिन के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करने से लोगों को काफी परेशानी होगी। सरकार को इस फैसले को वापस लेना चाहिए और कश्मीर के लोगों को सजा देना बंद करना चाहिए।
मीरवाइज मौलवी उमर फारूक
फैसले से लोग होंगे परेशान
सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता यूसुफ तारीगमी ने कहा कि श्रीनगर-जम्मू हाईवे में सप्ताह में दो दिन सिविलियन ट्रैफिक मूवमेंट बंद होने से लोगों को परेशानी पेश आएगी। हालांकि यह फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है। फैसले से कर्मचारियों, लोगों, व्यापारियों, छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। एंबुलेंस समेत अन्य वाहन भी नहीं चल सकेंगे।
मीरवाइज मौलवी उमर फारूक
फैसले से लोग होंगे परेशान
सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता यूसुफ तारीगमी ने कहा कि श्रीनगर-जम्मू हाईवे में सप्ताह में दो दिन सिविलियन ट्रैफिक मूवमेंट बंद होने से लोगों को परेशानी पेश आएगी। हालांकि यह फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है। फैसले से कर्मचारियों, लोगों, व्यापारियों, छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। एंबुलेंस समेत अन्य वाहन भी नहीं चल सकेंगे।