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राम माधव ने मुफ्ती को दिया मोदी का कड़ा संदेश

Thu, 12 Mar 2015 09:54 AM IST
Updated Thu, 12 Mar 2015 09:54 AM IST
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ram madhav meet cm mufti on masarat issue

भाजपा और पीडीपी में जारी खींचतान के बीच भाजपा महासचिव राम माधव ने मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद से मुलाकात कर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का संदेश दिया। भाजपा नेता ने पीडीपी को गठबंधन धर्म के पालन की नसीहत दी है।

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लगभग सवा घंटे तक मुख्यमंत्री आवास में चली बैठक के बाद भाजपा और पीडीपी के बीच तनाव समाप्त होने की संभावना बढ़ी है। मुफ्ती ने राम माधव को विश्वास दिलाया है कि गठबंधन सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर ही चलेगी।
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इस मुलाकात के बाद दोनों दलों में बयानबाजी छोड़कर विकास के एजेंडे के मुताबिक सरकार चलाने पर सहमति बन गई है।

भाजपा-पीडीपी सियासत में दो अलग-अलग ध्रुव

ram madhav meet cm mufti on masarat issue

गौरतलब है कि अलगाववादी नेता मसर्रत आलम का रिहाई के बाद भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई थीं। लोकसभा और राज्यसभा में सरकार की किरकिरी हुई और पूरे देश में गलत संदेश गया। नतीजतन भाजपा ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बाबत मुफ्ती सरकार से सफाई भी मांगी। भाजपा और पीडीपी सियासत में दो अलग-अलग ध्रुव रहे हैं। जनादेश का हवाला देकर दोनों दलों ने दो माह में सीएमपी तैयार किया और गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई।

पहले दिन से ही विवाद पैदा हुआ जब मुफ्ती ने शांतिपूर्ण मतदान का श्रेय अलगाववादियों, आतंकियों और पाकिस्तान को दिया। फिर पीडीपी विधायकों द्वारा अफजल गुरु के शव अवशेष उनके परिवार को सौंपने की मांग कर डाली। अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई के बाद भाजपा ने कठोर फैसले का मन बना लिया है।

म माधव का मुफ्ती को दो टूक जबाव

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सूत्रों के अनुसार राम माधव ने मुफ्ती से दो टूक कहा है कि भाजपा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से महत्वपूर्ण गठबंधन सरकार या अन्य कुछ भी नहीं है। इस मुद्दे पर समझौता संभव नहीं है। लिहाजा पीडीपी को फैसले लेते वक्त संयम बरतना होगा।

सरकार चलाने का दायित्व दोनों दलों पर है इसलिए एकतरफा फैसले को उचित नहीं ठहराया जा सकता। मुफ्ती ने सफाई दी कि गठबंधन सरकार के वजूद में आने से पहले ही मसर्रत की रिहाई का फैसला हो चुका था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब अहम फैसले में भाजपा को सहभागी बनाया जाएगा।


एक सप्ताह बाद जम्मू कश्मीर विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने वाला है। विधानसभा में अफजल गुरु का मामला फिर से उठ सकता है। तब गठबंधन सरकार के रुख पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। इसलिए बजट सत्र से पहले विवाद समाप्त करने की दिशा में भाजपा आलाकमान ने पहल की है।

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