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बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई गेहूं की सफल
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गांव छन्नी ताना में किसान फसल में गिरे ओले देखते हुए
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अखनूर। सीमावर्ती क्षेत्र में शनिवार रात हुई बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि गेहूं की फसल की बर्बादी का सर्वे कर मुआवजा दिया जाए।
सीमावर्ती क्षेत्र के चौकी चौरा, चननी, टरकवाल, टांडा, सुंगल सहित अन्य गांव में बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं , सरसों, गोभी सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। गेहूं की फसल एक और गिर गई है इस पर फसल को नुकसान होने की आशंका है। किसान देवराज ने बताया कि ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ है। फसल गिर गई है जिस पर फसल पर खत्म होने की संभावना है। इस पर सरकार को चाहिए कि ओलावृष्टि हुई फसल को नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए। किसान राज कुमार ने बताया रात्रि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। किसानों को परिवार में पालन पोषण की चिंता सताने लगी है।
बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल प्रभावित
छोटे बच्चों ने ओलों की कलाकृतियां बनाकर खूब मजा उठाया
परगवाल। पिछले कुछ दिनों से मौसम के बिगड़ते मिजाज ने आम लोगों के साथ-साथ सीमा क्षेत्र परगवाल के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद शनिवार की सुबह तेज धूप खिली, लेकिन मौसम ने एक बार फिर करवट बदली।
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शनिवार रात को तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। हालांकि ओलावृष्टि पूरे क्षेत्र में तो नहीं हुई, लेकिन इसकी चपेट में सरहद पर बसे गांव छन्नी ताना नजवाल और निकोवाल रहे। ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा प्रभावित गांव छन्नी ताना और नजवाल रहे। यहां दो से तीन इंच के करीब ओलावृष्टि हुई। ओले इतने ज्यादा पड़े जो दूसरे दिन रविवार दोपहर तक साफ देखे गए। ओलावृष्टि से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। गेहूं की फसल के साथ-साथ प्याज और दूसरी तरह की सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। उसके विपरीत छोटे बच्चों ने रविवार को तेज धूप खिलने पर ओले एकत्रित कर उसका खूब आनंद उठाया। बच्चों ने ओलों से तरह-तरह की कलाकृतियां बनाकर मोबाइल पर एक दूसरे को भेजीं। छुट्टी का दिन होने से कई घरों में बच्चे दोपहर को ओलों से खेलते नजर आए गांव छन्नी ताना के पंच संजय कुमार और गांव नजवाल के गुलाब सिंह का कहना था कि ओलावृष्टि से उनकी फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।
फसल बीमा करा चुके किसानों को मिलेगा मुआवजा
तीन हजार रुपये प्रति कनाल धान की फसल के नुकसान की दी जाएगी राशि
ज्यौड़ियां। अपनी फसल का बीमा करा चुके किसानों को अभी तक धान की फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं मिला पाया। इसके चलते खौड़ के वह सभी किसान परेशान थे, जिन्होंने अपनी फसल का बीमा कराया है। क्योंकि अन्य किसानों को धान की फसल के नुकसान का मुआवजा मिल चुका है। उन सभी किसानों को 31 मार्च से पहले रकबे के हिसाब से प्रति कनाल तीन हजार रुपये धान की फसल के नुकसान का मुआवजा मिलने जा रहा है। इसको लेकर सरकारी विभागों तथा बीमा कंपनियों की तरफ से प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संवाद
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सीमावर्ती क्षेत्र के चौकी चौरा, चननी, टरकवाल, टांडा, सुंगल सहित अन्य गांव में बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं , सरसों, गोभी सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। गेहूं की फसल एक और गिर गई है इस पर फसल को नुकसान होने की आशंका है। किसान देवराज ने बताया कि ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ है। फसल गिर गई है जिस पर फसल पर खत्म होने की संभावना है। इस पर सरकार को चाहिए कि ओलावृष्टि हुई फसल को नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए। किसान राज कुमार ने बताया रात्रि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। किसानों को परिवार में पालन पोषण की चिंता सताने लगी है।
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बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल प्रभावित
छोटे बच्चों ने ओलों की कलाकृतियां बनाकर खूब मजा उठाया
परगवाल। पिछले कुछ दिनों से मौसम के बिगड़ते मिजाज ने आम लोगों के साथ-साथ सीमा क्षेत्र परगवाल के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद शनिवार की सुबह तेज धूप खिली, लेकिन मौसम ने एक बार फिर करवट बदली।
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शनिवार रात को तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। हालांकि ओलावृष्टि पूरे क्षेत्र में तो नहीं हुई, लेकिन इसकी चपेट में सरहद पर बसे गांव छन्नी ताना नजवाल और निकोवाल रहे। ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा प्रभावित गांव छन्नी ताना और नजवाल रहे। यहां दो से तीन इंच के करीब ओलावृष्टि हुई। ओले इतने ज्यादा पड़े जो दूसरे दिन रविवार दोपहर तक साफ देखे गए। ओलावृष्टि से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। गेहूं की फसल के साथ-साथ प्याज और दूसरी तरह की सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। उसके विपरीत छोटे बच्चों ने रविवार को तेज धूप खिलने पर ओले एकत्रित कर उसका खूब आनंद उठाया। बच्चों ने ओलों से तरह-तरह की कलाकृतियां बनाकर मोबाइल पर एक दूसरे को भेजीं। छुट्टी का दिन होने से कई घरों में बच्चे दोपहर को ओलों से खेलते नजर आए गांव छन्नी ताना के पंच संजय कुमार और गांव नजवाल के गुलाब सिंह का कहना था कि ओलावृष्टि से उनकी फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।
फसल बीमा करा चुके किसानों को मिलेगा मुआवजा
तीन हजार रुपये प्रति कनाल धान की फसल के नुकसान की दी जाएगी राशि
ज्यौड़ियां। अपनी फसल का बीमा करा चुके किसानों को अभी तक धान की फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं मिला पाया। इसके चलते खौड़ के वह सभी किसान परेशान थे, जिन्होंने अपनी फसल का बीमा कराया है। क्योंकि अन्य किसानों को धान की फसल के नुकसान का मुआवजा मिल चुका है। उन सभी किसानों को 31 मार्च से पहले रकबे के हिसाब से प्रति कनाल तीन हजार रुपये धान की फसल के नुकसान का मुआवजा मिलने जा रहा है। इसको लेकर सरकारी विभागों तथा बीमा कंपनियों की तरफ से प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संवाद