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Jammu News: रेलवे में कारीगरों के लिए कौशल परीक्षा अनिवार्य
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- क्यूआर कोड प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा काम
- ठेकेदारों के कारीगरों और पर्यवेक्षकों की होगी दक्षता जांच
- सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों पर लागू होगी नई नीति
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। रेलवे ने अपनी निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने कारीगरों और पर्यवेक्षकों के कौशल विकास एवं प्रमाणन से संबंधित नई नीति जारी की है। इसके तहत रेलवे परियोजनाओं में ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले कारीगरों और पर्यवेक्षकों की कार्यक्षमता की जांच की जाएगी।
निर्धारित नियमों के अनुसार, संबंधित कार्य के लिए वैध कौशल प्रमाणपत्र के बिना कर्मचारियों को काम पर नहीं लगाया जा सकेगा। बोर्ड की स्थापना एवं प्रशिक्षण विभाग की उप निदेशक-द्वितीय नीलम शर्मा द्वारा जारी यह आदेश सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों पर लागू होगी।
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निर्माण से लेकर वेल्डिंग तक के काम शामिल
नई नीति के दायरे में निर्माण, बिजली, मशीनों की मरम्मत, संकेत एवं दूरसंचार, रेल पटरियों का रखरखाव, रेल डिब्बों की मरम्मत, वेल्डिंग, धातु निर्माण और सफाई सहित विभिन्न कार्य शामिल हैं। संबंधित क्षेत्रीय रेलवे परियोजना की जरूरत के अनुसार आवश्यक कौशल की पहचान करेगी। कारीगरों की परीक्षा में व्यावहारिक काम और मौखिक सवाल शामिल होंगे। वहीं, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट लिखने, संवाद करने और तकनीकी जानकारी की जांच की जाएगी। संबंधित विभागाध्यक्ष परीक्षा लेने के लिए अधिकारियों को नामित करेंगे।
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परीक्षा में असफल कारीगर तीन महीने बाद दे सकेंगे दोबारा परीक्षा
परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को क्यूआर कोड वाला कौशल प्रमाणपत्र या पहचान-पत्र दिया जाएगा। इसके माध्यम से डिजिटल अभिलेख में उनकी योग्यता की पुष्टि की जा सकेगी। प्रमाणपत्र निर्धारित अवधि तक मान्य रहेगा। परीक्षा में असफल कारीगरों को तीन महीने बाद दोबारा अवसर देने का प्रावधान बताया गया है। रेलवे का लक्ष्य परीक्षा प्रक्रिया एक से दो दिनों में पूरी करना है। इस व्यवस्था से ठेकेदारों को योग्य कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी और रेलवे परियोजनाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा तथा कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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- ठेकेदारों के कारीगरों और पर्यवेक्षकों की होगी दक्षता जांच
- सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों पर लागू होगी नई नीति
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। रेलवे ने अपनी निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने कारीगरों और पर्यवेक्षकों के कौशल विकास एवं प्रमाणन से संबंधित नई नीति जारी की है। इसके तहत रेलवे परियोजनाओं में ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले कारीगरों और पर्यवेक्षकों की कार्यक्षमता की जांच की जाएगी।
निर्धारित नियमों के अनुसार, संबंधित कार्य के लिए वैध कौशल प्रमाणपत्र के बिना कर्मचारियों को काम पर नहीं लगाया जा सकेगा। बोर्ड की स्थापना एवं प्रशिक्षण विभाग की उप निदेशक-द्वितीय नीलम शर्मा द्वारा जारी यह आदेश सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों पर लागू होगी।
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निर्माण से लेकर वेल्डिंग तक के काम शामिल
नई नीति के दायरे में निर्माण, बिजली, मशीनों की मरम्मत, संकेत एवं दूरसंचार, रेल पटरियों का रखरखाव, रेल डिब्बों की मरम्मत, वेल्डिंग, धातु निर्माण और सफाई सहित विभिन्न कार्य शामिल हैं। संबंधित क्षेत्रीय रेलवे परियोजना की जरूरत के अनुसार आवश्यक कौशल की पहचान करेगी। कारीगरों की परीक्षा में व्यावहारिक काम और मौखिक सवाल शामिल होंगे। वहीं, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट लिखने, संवाद करने और तकनीकी जानकारी की जांच की जाएगी। संबंधित विभागाध्यक्ष परीक्षा लेने के लिए अधिकारियों को नामित करेंगे।
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परीक्षा में असफल कारीगर तीन महीने बाद दे सकेंगे दोबारा परीक्षा
परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को क्यूआर कोड वाला कौशल प्रमाणपत्र या पहचान-पत्र दिया जाएगा। इसके माध्यम से डिजिटल अभिलेख में उनकी योग्यता की पुष्टि की जा सकेगी। प्रमाणपत्र निर्धारित अवधि तक मान्य रहेगा। परीक्षा में असफल कारीगरों को तीन महीने बाद दोबारा अवसर देने का प्रावधान बताया गया है। रेलवे का लक्ष्य परीक्षा प्रक्रिया एक से दो दिनों में पूरी करना है। इस व्यवस्था से ठेकेदारों को योग्य कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी और रेलवे परियोजनाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा तथा कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।