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18 साल बाद कार बम का इस्तेमाल, पढ़ें पहले कब हुआ था ऐसा हमला...
Fri, 15 Feb 2019 06:59 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: राजेश सैनी
Updated Fri, 15 Feb 2019 06:59 AM IST
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pulwama attack
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जम्मू-कश्मीर में 18 साल बाद एक बार फिर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने कार बम का हमले के लिए इस्तेमाल किया है। इससे पहले 2001 में श्रीनगर में विधानसभा परिसर में विस्फोटक से भरी टाटा सूमो को टकराकर फिदायीन हमला किया गया था। साथ ही दूसरी बार स्थानीय मानव बम का हमले में इस्तेमाल किया गया। इसके पहले भी तीन बार स्थानीय लोगों का फिदायीन हमले के लिए इस्तेमाल किया गया था, लेकिन सुरक्षा बलों के परिसर में वे घुस नहीं सके थे।
1 अक्तूबर 2001 को जैश के तीन फिदायीनों ने विस्फोटक से भरे टाटा सूमो से विधानसभा परिसर को निशाना बनाया था। हमले में तीनों फिदायीन मारे गए थे। साथ ही 38 लोगों की मौत हुई थी। हमले में एक पाकिस्तानी वजाहत हुसैन का नाम सामने आने के बाद केंद्र ने कड़ी आपत्ति जताई थी। बताते हैं कि वर्ष 1999 में भी श्रीनगर में 15 कोर मुख्यालय से एक स्थानीय फिदायीन ने कार को गेट से टकराकर अपने को उड़ा लिया था। हालांकि, इसमें किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं थी। 2003 और 2005 में भी इसी प्रकार की कोशिश हुई थी।
पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ कैंप पर जनवरी 2018 में दो स्थानीय फिदायीनों ने हमला किया था। यह पहला मामला था जिसमें स्थानीय फिदायीन सुरक्षा बलों के परिसर में घुसने में सफल हुए थे। इसमें चार जवान शहीद हुए थे। फरदीन और मंजूर बाबा नाम के इन दोनों आतंकियों को पुलवामा के त्राल के नूर मोहम्मद ने ट्रेंड किया था। हमले से पहले फरदीन ने वीडियो बनाया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ठीक इसी प्रकार इस घटना में भी आदिल ने हमले से पहले वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
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डेढ़ दशक बाद नए ट्रेंड से सुरक्षा एजेंसियों के माथे पर बल
डेढ़ दशक बाद इस नए ट्रेंड से सुरक्षा एजेंसियों के माथे पर बल है। उनका मानना है कि इस तरह के ट्रेंड से सुरक्षा कर पाना संभव नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत वीआईपी मूवमेंट तथा सुरक्षा बलों के काफिले के गुजरने के दौरान होगी।
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1 अक्तूबर 2001 को जैश के तीन फिदायीनों ने विस्फोटक से भरे टाटा सूमो से विधानसभा परिसर को निशाना बनाया था। हमले में तीनों फिदायीन मारे गए थे। साथ ही 38 लोगों की मौत हुई थी। हमले में एक पाकिस्तानी वजाहत हुसैन का नाम सामने आने के बाद केंद्र ने कड़ी आपत्ति जताई थी। बताते हैं कि वर्ष 1999 में भी श्रीनगर में 15 कोर मुख्यालय से एक स्थानीय फिदायीन ने कार को गेट से टकराकर अपने को उड़ा लिया था। हालांकि, इसमें किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं थी। 2003 और 2005 में भी इसी प्रकार की कोशिश हुई थी।
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पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ कैंप पर जनवरी 2018 में दो स्थानीय फिदायीनों ने हमला किया था। यह पहला मामला था जिसमें स्थानीय फिदायीन सुरक्षा बलों के परिसर में घुसने में सफल हुए थे। इसमें चार जवान शहीद हुए थे। फरदीन और मंजूर बाबा नाम के इन दोनों आतंकियों को पुलवामा के त्राल के नूर मोहम्मद ने ट्रेंड किया था। हमले से पहले फरदीन ने वीडियो बनाया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ठीक इसी प्रकार इस घटना में भी आदिल ने हमले से पहले वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
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डेढ़ दशक बाद इस नए ट्रेंड से सुरक्षा एजेंसियों के माथे पर बल है। उनका मानना है कि इस तरह के ट्रेंड से सुरक्षा कर पाना संभव नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत वीआईपी मूवमेंट तथा सुरक्षा बलों के काफिले के गुजरने के दौरान होगी।