पुलवामा हमले की जांच पूरी होने की कगार पर, यहां तक पहुंचने में एनआईए को लगा एक साल
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पुलवामा में सीआरपीएफ (केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल) काफिले पर 14 फरवरी 2019 को हुए आत्मघाती हमले के पांच षड्यंत्रकारियों या इसे अंजाम देने वाले विभिन्न मुठभेड़ों में मार गिराए गए हैं। इसके साथ ही इस घटना की जांच उस बिंदु पर पहुंच गई है जहां से इसके आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं है। यह कहना है जांच से जुड़े अधिकारियों का।
उनका कहना है कि, हालांकि इस मामले ने एनआईए( राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) के लिए कई चुनौतियां पेश की क्योंकि हमले को अंजाम देने वालों या इसके सरगना के बारे में कोई ठोस सूचना उपलब्ध नहीं थी। इसलिए यह अंधेरे में हाथ पैर मारने जैसा एक मामला था। दबी जुबान से कई तरह की बातें की जा रही थीं लेकिन हर चीज के कानूनी पहलू का ध्यान रखना था।
पहली चुनौती तो आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार द्वारा हमले में इस्तेमाल की गई कार के असली मालिक का पता लगाना था। जबकि अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रो ग्लीसरीन और आरडीएक्स जैसे विस्फोटकों से लदा वाहन नष्ट हो गया था। फोरेंसिक पद्धतियों और सावधानीपूर्वक की गई जांच से कार के सीरियल नंबर का पता लगाया गया।
इसके बाद कुछ ही समय में वाहन के मालिकाना हक का शुरू से अंत तक पता कर लिया गया। विस्फोट में कार के परखच्चे उड़ गए थे। कार का अंतिम मालिक एवं अनंतनाग के बिजबिहाड़ा का सज्जाद भट 14 फरवरी को हमले से कुछ घंटे पहले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हो गया था। वह 2019 में जून में एक मुठभेड़ में मारा गया।
अधिकारी ने बताया कि यह स्पष्ट है कि आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार था लेकिन यह साक्ष्य से भी स्थापित करना पड़ा। विभिन्न स्थानों से मानव अवशेषों को जुटा कर उन्हें डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए भेजा गया। कार के मलबे से लिए गए डीएनए के नमूनों का उसके पिता के डीएनए से मिलान कर पुष्टि की गई।
बताया कि मुदस्सिर अहमद खान, कारी मुफ्ती यासीर और कामरान सहित अन्य षड्यंत्रकारियों की भूमिका उजागर हुई लेकिन वे सभी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए। पिछले साल 10 मार्च को मुदस्सिर, 29 मार्च को कामरान, 18 जून को सज्जाद भट मारा गया जबकि कारी 25 जनवरी 2020 को मारा गया। इस मामले में आरोप पत्र में अब तक आठ लोगों को नामजद किया गया है।
जैश-ए-मोहम्मद के प्रवक्ता मोहम्मद हसन के एक वीडियो में इस हमले की उसके संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने के बाद इसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया और इंटरनेट प्रोटोकॉल पते से पाकिस्तान स्थित एक कंप्यूटर से इसे जारी किए जाने के बारे में जानकारी मिली। जांच के दौरान एनआईए ने जैश ए मोहम्मद के ओजीडब्ल्यू मॉड्यूल के एक अन्य मामले का पता लगाया।