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डिग्री पूर्ण करने के लिए दिया जाए छह माह का समय
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जम्मू। स्नातक एकिकृत डिग्री कोर्स में असफल रहे 2017 सत्र के छात्रों ने मंगलवार को वीसी कार्यालय का घेराव कर छह माह का अतिरिक्त समय देने की गुहार लगाई। इसके साथ विश्वविद्यालय प्रबंधन पर नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। वहीं, उपराज्यपाल और विवि प्रशासन से राहत देने की अपील की है।
मानिक शर्मा के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए छात्रों ने बताया कि 2017 में दाखिला लिया था। इसके बाद कई सेमेस्टर में असफल रहे। कोरोना महामारी शुरू होने से पढ़ाई प्रभावित हुई। कई विद्यार्थी जहां कोरोना महामारी की चपेट में आ गए हैं वहीं कई परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सके। ऑनलाइन मोड से भी परीक्षाएं ली गईं, लेकिन दूरदराज इलाकों के छात्र नेटवर्क नहीं होने के कारण परीक्षा नहीं दे पाए हैं।
राहुल, अरविंद और साहिल आदि ने कहा कि जब छात्र दोबारा परीक्षा या पुनर्मूल्यांकन के लिए फार्म भरने लगे तो प्रशासन ने रोक लगा दी।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिग्री की समयावधि पांच साल पूर्ण हो चुके हैं। अब न तो वह परीक्षा दे सकते हैं और न ही पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसलिए छात्रों में रोष है। छात्रों का कहना है कि कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। छात्रों के अनुसार डिग्री की पांच साल की समयावधि पूर्ण नहीं हुई है। अभी छह माह शेष हैं, लेकिन प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने इस संबंध में दोबारा परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंप कर छह माह का समय देने की मांग उठाई है। इसके साथ ही जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालय की तर्ज पर राहत देने की उपराज्यपाल से गुहार लगाई है, ताकि डिग्री पूर्ण हो सके।
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मानिक शर्मा के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए छात्रों ने बताया कि 2017 में दाखिला लिया था। इसके बाद कई सेमेस्टर में असफल रहे। कोरोना महामारी शुरू होने से पढ़ाई प्रभावित हुई। कई विद्यार्थी जहां कोरोना महामारी की चपेट में आ गए हैं वहीं कई परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सके। ऑनलाइन मोड से भी परीक्षाएं ली गईं, लेकिन दूरदराज इलाकों के छात्र नेटवर्क नहीं होने के कारण परीक्षा नहीं दे पाए हैं।
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राहुल, अरविंद और साहिल आदि ने कहा कि जब छात्र दोबारा परीक्षा या पुनर्मूल्यांकन के लिए फार्म भरने लगे तो प्रशासन ने रोक लगा दी।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिग्री की समयावधि पांच साल पूर्ण हो चुके हैं। अब न तो वह परीक्षा दे सकते हैं और न ही पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसलिए छात्रों में रोष है। छात्रों का कहना है कि कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। छात्रों के अनुसार डिग्री की पांच साल की समयावधि पूर्ण नहीं हुई है। अभी छह माह शेष हैं, लेकिन प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने इस संबंध में दोबारा परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंप कर छह माह का समय देने की मांग उठाई है। इसके साथ ही जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालय की तर्ज पर राहत देने की उपराज्यपाल से गुहार लगाई है, ताकि डिग्री पूर्ण हो सके।
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