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प्रशासन ने वैष्णो देवी लिंक मार्ग का काम रुकवाया, दुकानदारों की हड़ताल जारी
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 03 Mar 2017 08:27 PM IST
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कटड़ा में प्रदर्शन करते दुकानदार
- फोटो : Amar Ujala
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वैष्णो देवी भवन के लिए कटड़ा-अर्द्धकुंवारी के बीच बाण गंगा लिंक मार्ग निर्माण कार्य को जिला प्रशासन ने रुकवा दिया है। लिंक मार्ग पर घमासान के दूसरे दिन दुकानदाराें के प्रदर्शन, बंद और घोड़ा पिट्ठू वालाें की हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारी नेताआें को रिहा कर दिया।
निर्माण कार्य रुकवाने का आदेश जारी कर जिला प्रशासन ने शनिवार को निर्माण स्थल का दौरा कर श्राइन बोर्ड और अन्य पक्षकारों के साथ बातचीत से समाधान खोजने का निर्णय लिया है। प्रशासन के आश्वासन पर यात्रियाें की मुश्किलाें को देखते हुए घोड़ा पिट्ठू वाले काम पर लौट गए। दुकानदाराें ने भी धरना स्थगित कर दिया। हालांकि दुकानदार बाजार बंद रखने के फैसले पर कायम हैं।
शुक्रवार की सुबह से ही बाण गंगा में भवन मार्ग के दुकानदारों, घोड़े, पिठ्ठू व पालकी वालों ने एकत्रित होना शुरू कर दिया। श्राइन बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यह हुजूम मुख्य बस स्टैंड पहुंचा। शाम चार बजे तक धरना-प्रदर्शन करते हुए मार्ग अवरुद्ध रखा। इस दौरान जिला उपायुक्त रवींद्र कुमार और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने गिरफ्तार नेताओं और स्थानीय लोगाें के साथ एसपी कार्यालय में बैठक की।
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शनिवार को निर्माणस्थल और भवन मार्ग का दौरा कर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। श्राइन बोर्ड के उच्च अधिकारियों से भी बातचीतकी जाएगी। प्रशासन की ओर से मिले इस आश्वासन के साथ गिरफ्तार किए गए नेताओं को रिहा कर दिया गया। उसके बाद धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
वहीं प्रदर्शनकारियों ने भवन मार्ग की दुकानों को फिलहाल बंद रखने निर्णय लिया है। इस सब के बीच यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घोड़े, पिठ्ठू व पालकी वालों की काम पर लौटने पर सहमती बन गई। रिहा हुए नेता सोहन सिंह, करण सिंह, प्रभात सिंह आदि का कहना था कि वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनकी आगामी रणनीति प्रशासनिक टीम के शनिवार को प्रस्तावित दौरे पर निर्भर करेगी। दीगर है कि इस मामले को लेकर राज्यपाल ने भी एक टीम का गठन किया था।
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निर्माण कार्य रुकवाने का आदेश जारी कर जिला प्रशासन ने शनिवार को निर्माण स्थल का दौरा कर श्राइन बोर्ड और अन्य पक्षकारों के साथ बातचीत से समाधान खोजने का निर्णय लिया है। प्रशासन के आश्वासन पर यात्रियाें की मुश्किलाें को देखते हुए घोड़ा पिट्ठू वाले काम पर लौट गए। दुकानदाराें ने भी धरना स्थगित कर दिया। हालांकि दुकानदार बाजार बंद रखने के फैसले पर कायम हैं।
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शुक्रवार की सुबह से ही बाण गंगा में भवन मार्ग के दुकानदारों, घोड़े, पिठ्ठू व पालकी वालों ने एकत्रित होना शुरू कर दिया। श्राइन बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यह हुजूम मुख्य बस स्टैंड पहुंचा। शाम चार बजे तक धरना-प्रदर्शन करते हुए मार्ग अवरुद्ध रखा। इस दौरान जिला उपायुक्त रवींद्र कुमार और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने गिरफ्तार नेताओं और स्थानीय लोगाें के साथ एसपी कार्यालय में बैठक की।
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शनिवार को निर्माणस्थल और भवन मार्ग का दौरा कर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। श्राइन बोर्ड के उच्च अधिकारियों से भी बातचीतकी जाएगी। प्रशासन की ओर से मिले इस आश्वासन के साथ गिरफ्तार किए गए नेताओं को रिहा कर दिया गया। उसके बाद धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
वहीं प्रदर्शनकारियों ने भवन मार्ग की दुकानों को फिलहाल बंद रखने निर्णय लिया है। इस सब के बीच यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घोड़े, पिठ्ठू व पालकी वालों की काम पर लौटने पर सहमती बन गई। रिहा हुए नेता सोहन सिंह, करण सिंह, प्रभात सिंह आदि का कहना था कि वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनकी आगामी रणनीति प्रशासनिक टीम के शनिवार को प्रस्तावित दौरे पर निर्भर करेगी। दीगर है कि इस मामले को लेकर राज्यपाल ने भी एक टीम का गठन किया था।
दिनभर परेशान रहे श्रद्धालु, शाम को मिली राहत
मार्ग पर बंद दुकानें
- फोटो : Amar Ujala
शुक्रवार को घोड़े, पिठ्ठू और पालकी वालों की हड़ताल के साथ भवन मार्ग की दुकानें बंद रहने का सीधा असर दर्शन को जाने वाले यात्रियों पर देखने को मिला। घोड़े और पिठ्ठू की तलाश में यात्री बाण गंगा में दरबदर होते रहे। कई बुजुर्ग यात्रियों को दर्शन के लिए जाने का निर्णय स्थगित तक करना पड़ा।
गाजियाबाद निवासी 60 वर्षीय दिनेश अग्रवाल का कहना था कि हेलीकाप्टर की टिकट नहीं मिल पाने पर घोड़े पर जाने का निर्णय लिया था, लेकिन घोड़ा नहीं मिलने पर यात्रा को स्थगित करना पड़ा है। वहीं शाम को पिठ्ठू और घोड़े वालों के काम पर लोटने की सहमति बनने से यात्रियों को राहत मिली।
गाजियाबाद निवासी 60 वर्षीय दिनेश अग्रवाल का कहना था कि हेलीकाप्टर की टिकट नहीं मिल पाने पर घोड़े पर जाने का निर्णय लिया था, लेकिन घोड़ा नहीं मिलने पर यात्रा को स्थगित करना पड़ा है। वहीं शाम को पिठ्ठू और घोड़े वालों के काम पर लोटने की सहमति बनने से यात्रियों को राहत मिली।