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स्कूल खुले लेकिन परिवहन सुविधा नहीं मिलने से बच्चे, अभिभावक परेशान
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जम्मू। समर जोन में दो साल बाद मिडिल स्कूल भी खुल चुके हैं, लेकिन परिवहन सुविधा नहीं मिलने से बच्चें और अभिभावक परेशान हैं। समर जोन में अधिकांश निजी स्कूल संचालकों ने परिवहन सुविधा को शुरू नहीं किया है। इस कारण अभिभावक बच्चों को स्कूल पहुंचाने और ले जाने के लिए मजबूर हैं। वहीं, निजी स्कूल संचालकों ने नए सत्र से बच्चों को परिवहन सुविधा मुहैया करवाने का आश्वासन दिया है।
14 फरवरी से कक्षा नौवीं से 12वीं और 21 से कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के स्कूल खुल चुके हैं। लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी के चलते बच्चे और अभिभावक परेशान हैं। निजी स्कूल संचालकों की ओर से परिवहन सुविधा नहीं मुहैया करवाई जा रही है। इस कारण अभिभावक स्वयं या वाहन हायर कर बच्चों को स्कूल भेजने और लाने के लिए मजबूर हैं। कोविड के बीच बच्चों को बिना किसी जिम्मेदारी के स्कूल भेजने से अभिभावक चिंतित हैं। अभिभावक सोहन कुमार, तुषार कुमार और राकेश कुमार ने कहा कि स्कूलों की ओर से परिवहन सुविधा नहीं देने से परेशानी बढ़ गई है। निजी वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजना बड़ी चुनौती है। स्कूलों को परिवहन सुविधा मुहैया करवानी चाहिए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
वाहन दो साल से खड़े हैं। परिवहन विभाग खड़े वाहनों का भी रोड टैक्स मांग रहा है। हर बस को दोबारा सड़कों पर उतारने के लिए 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आएगा। सरकार हमें मदद देने को तैयार नहीं है। अभिभावन परिवहन शुल्क नहीं देंगे। ऐसे में एक दम से परिवहन सुविधा देना संभव नहीं है। नए शैक्षणिक सत्र से सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएंगी।
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- कमल गुप्ता, अध्यक्ष, जेके प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
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14 फरवरी से कक्षा नौवीं से 12वीं और 21 से कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के स्कूल खुल चुके हैं। लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी के चलते बच्चे और अभिभावक परेशान हैं। निजी स्कूल संचालकों की ओर से परिवहन सुविधा नहीं मुहैया करवाई जा रही है। इस कारण अभिभावक स्वयं या वाहन हायर कर बच्चों को स्कूल भेजने और लाने के लिए मजबूर हैं। कोविड के बीच बच्चों को बिना किसी जिम्मेदारी के स्कूल भेजने से अभिभावक चिंतित हैं। अभिभावक सोहन कुमार, तुषार कुमार और राकेश कुमार ने कहा कि स्कूलों की ओर से परिवहन सुविधा नहीं देने से परेशानी बढ़ गई है। निजी वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजना बड़ी चुनौती है। स्कूलों को परिवहन सुविधा मुहैया करवानी चाहिए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
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वाहन दो साल से खड़े हैं। परिवहन विभाग खड़े वाहनों का भी रोड टैक्स मांग रहा है। हर बस को दोबारा सड़कों पर उतारने के लिए 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आएगा। सरकार हमें मदद देने को तैयार नहीं है। अभिभावन परिवहन शुल्क नहीं देंगे। ऐसे में एक दम से परिवहन सुविधा देना संभव नहीं है। नए शैक्षणिक सत्र से सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएंगी।
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- कमल गुप्ता, अध्यक्ष, जेके प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन