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दूसरी लहर में भी नहीं खुल पाया चोपड़ा नर्सिंग होम
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जम्मू। प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर भी निकल गई, लेकिन जीएमसी जम्मू में मरीजों को सरकारी स्तर पर पेड चिकित्सा के लिए कर्नल सर आरएन चोपड़ा नर्सिंग होम को दोबारा बहाल नहीं किया जा सका है। जीएमसी प्रशासन की ओर से इस नर्सिंग होम को शुरू करने के लिए कई दावे किए गए, मगर अभी तक मरीजों को इसका इंतजार है। जबकि श्रीनगर में मरीजों को पेड सिस्टम पर चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।
चोपड़ा नर्सिंग होम को अगस्त 2017 में बंद कर दिया गया था, जिसके बाद जीएमसी प्रशासन इसे बहाल करने में हिम्मत नहीं दिखा पाया है। सरकारी स्तर पर नर्सिंग होम में मरीजों को सामान्य सर्जरी की सुविधा दी जाती थी। जिससे मरीजों को सर्जरी के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता था। नर्सिंग होम के पहले और दूसरे फ्लोर पर 16-16 रूम स्थापित हैं। तीसरे फ्लोर पर अगस्त 2015 में कैंसर मरीजों के लिए अनकोलाजी वार्ड शुरू किया गया था, जिसमें मौजूदा समय में भी मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। नर्सिंग होम को 21 दिसंबर 1989 को डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शुरू करवाया था। इसका उद्देश्य निर्धारित दरों पर पैकेज के हिसाब से मरीजों को सर्जरी करवाने का विकल्प दिया गया था। पिछले तीन साल से नर्सिंग होम के बंद रहने से जीएमसी प्रशासन को लाखों रुपये के राजस्व भी जुट नहीं पाया है। नर्सिंग होम को बंद करने के पीछे जीएमसी प्रशासन की ओर से वहां लीकेज और मरम्मत का तर्क दिया गया था। तब नर्सिंग होम में रोजाना 3-4 गाल ब्लेडर, पत्थरी, बवासीर, फिचुला आदि की सर्जरी की जाती थी। लेकिन पिछले कई सालों से चोपड़ा नर्सिंग होम के खुलने का इंतजार ही किया जा रहा है। कोविड के दौर में अगर चोपड़ा नर्सिंग होम बहाल होता तो संक्रमित मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकती थीं।
डीपीआर तैयार, काम शुरू किया जा रहा : प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन का कहना है कि चोपड़ा नर्सिंग होम को बहाल करने के लिए डीपीआर तैयार की गई है और काम शुरू किया जा रहा है। इसमें चरणबद्ध तरीके से फ्लोर स्तर पर बहाल किया जाएगा। इसमें मरीजों को पेड चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
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चोपड़ा नर्सिंग होम को अगस्त 2017 में बंद कर दिया गया था, जिसके बाद जीएमसी प्रशासन इसे बहाल करने में हिम्मत नहीं दिखा पाया है। सरकारी स्तर पर नर्सिंग होम में मरीजों को सामान्य सर्जरी की सुविधा दी जाती थी। जिससे मरीजों को सर्जरी के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता था। नर्सिंग होम के पहले और दूसरे फ्लोर पर 16-16 रूम स्थापित हैं। तीसरे फ्लोर पर अगस्त 2015 में कैंसर मरीजों के लिए अनकोलाजी वार्ड शुरू किया गया था, जिसमें मौजूदा समय में भी मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। नर्सिंग होम को 21 दिसंबर 1989 को डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शुरू करवाया था। इसका उद्देश्य निर्धारित दरों पर पैकेज के हिसाब से मरीजों को सर्जरी करवाने का विकल्प दिया गया था। पिछले तीन साल से नर्सिंग होम के बंद रहने से जीएमसी प्रशासन को लाखों रुपये के राजस्व भी जुट नहीं पाया है। नर्सिंग होम को बंद करने के पीछे जीएमसी प्रशासन की ओर से वहां लीकेज और मरम्मत का तर्क दिया गया था। तब नर्सिंग होम में रोजाना 3-4 गाल ब्लेडर, पत्थरी, बवासीर, फिचुला आदि की सर्जरी की जाती थी। लेकिन पिछले कई सालों से चोपड़ा नर्सिंग होम के खुलने का इंतजार ही किया जा रहा है। कोविड के दौर में अगर चोपड़ा नर्सिंग होम बहाल होता तो संक्रमित मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकती थीं।
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डीपीआर तैयार, काम शुरू किया जा रहा : प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन का कहना है कि चोपड़ा नर्सिंग होम को बहाल करने के लिए डीपीआर तैयार की गई है और काम शुरू किया जा रहा है। इसमें चरणबद्ध तरीके से फ्लोर स्तर पर बहाल किया जाएगा। इसमें मरीजों को पेड चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
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