लोकतंत्र का महापर्व: रंगीन झालरों से सजे पोलिंग स्टेशन
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लोकतंत्र के महापर्व पर गांदरबल से कंगन और सोनावारी से बांडीपोरा तक जश्न का माहौल दिखा। हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने भी वोटरों के उत्साह के आगे घुटने टेक दिए। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा वोट डालने पहुंचे। सुबह से ही पोलिंग बूथों पर कतारें लगने लगीं। माडल मतदान केंद्रों पर वोटरों के लिए चाय-पानी का इंतजाम भी था।
इन केंद्रों में सजावट की झालरें जम्हूरियत के उत्सव को रंगीन बना रही। फिरन के अंदर कांगड़ी लटकाए वोटर घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। युवा वोटरों में ज्यादा उत्साह दिखा। महिलाएं सभी मतदान केंद्रों पर पुरुषों के बराबर ही मौजूद थी। अलगाववादियों में इस बार बहिष्कार के लिए असमंजस की स्थिति अंत तक बनी रही। बाद में मतदान के दिन हड़ताल की अपील तो हुई लेकिन वह बेअसर ही रही।
गांदरबल के वाहिदपोरा पोलिंग बूथ पर सुबह 8 बजे से ही महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंच चुकी थीं। यहां गर्वनमेंट ब्वायज और गर्ल्स स्कूल के बूथ साथ-साथ हैं। युवा इशफाक ने कहा कि हम अपने हक को किसी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते। गुलाम हसन भट पहली बार वोट डालने आए थे। उन्होंने कहा कि बहिष्कार की बात बेमतलब है।
हर ओर दिखा जश्न सा माहौल
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस बार अपनी इस पुश्तैनी सीट से मैदान में नहीं हैं। यहां नेकां का पीडीपी और अवामी इंसाफ पार्टी से मुकाबला है। पीडीपी के प्रत्याशी काजी मोहम्मद अफजल ने कहा कि वोट किसे भी मिले लेकिन अधिकार का उपयोग जरूर होना चाहिए।
लार के दोनों पोलिंग केंद्रों पर महिलाओं की कतार पुरुषों से बड़ी थी और तहसीलदार के कैंपस से बाहर सड़क तक पहुंच गई थीं। मोहम्मद रमजान मोगरे ने कहा कि महिलाएं वोट डालने का काम पूरा कर घर में खाना बनाने जाएंगी। कंगन में वन मंत्री मियां अल्ताफ के इलाके में भी खासा उत्साह दिखा।
बड़ी संख्या में गुज्जर समुदाय के लोग हारीपोरा के मतदान केंद्र पर पहुंचे थे। विकलांग महिलाएं और बुजुर्ग भी वोट डालते देखे गए। बुसन के दोनों मतदान केंद्रों पर पेयजल और शौचालय का इंतजाम किया गया था। चीवा और शादीपोरा में भी जोश का यही आलम था।