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सेना प्रमुख के बयान पर कश्मीर घाटी में शुरू हुई सियासत

Thu, 16 Feb 2017 09:19 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Thu, 16 Feb 2017 09:19 PM IST
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politics on army chief statement
सेना प्रमुख विपिन रावत - फोटो : File Photo
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर घाटी में सियासत शुरू हो गई है। जहां एक ओर भाजपा इस बयान को लोगों के लिए एक सलाह के तौर पर मान रही है, वहीं विपक्ष के साथ-साथ कश्मीर के अलगाववादी इस बयान के चलते हालात और बिगड़ने की आशंका जता रहे हैं, लेकिन इस बीच पीडीपी चुप्पी साधे बैठी है। शायद उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता सता रही है।
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भाजपा प्रवक्ता खालिद जहांगीर ने बताया कि सेना प्रमुख जनरल ने बयान दिया कि कश्मीर की जनता सेना के आतंकियों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों में बाधा न बने।
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उन्होंने कहा कि इसे अभिभावकों को ध्यान में रखते हुए अपने बच्चों की काउंसलिंग करनी चाहिए और यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि उनके बच्चे राष्ट्र विरोधी तत्वों के झांसे में न आएं। जहांगीर ने यह भी कहा कि यह बयान कोई गलत बयान नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि लोगों को सेना के ऑपरेशनों से दूरी बनाने की आवश्यकता है, ताकि सेना के स्टैंडर्ड ऑपरेशनल प्रोसीजर (एसओपी) में कोई बाधा न आए।
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रियासत के विपक्षी दलों ने सेना प्रमुख के बयान को ठहराया गलत

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सुरक्षाबलों पर पथराव करते युवक - फोटो : FILE PHOTO
उधर पीडीपी के करीब सभी नेता अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सेना प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया देने से मना करते रहे। उनके अनुसार इस पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते। मुख्य विपक्षी दल नेकां ने सेना प्रमुख पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए इस बयान को गलत ठहराया। नेकां प्रवक्ता जुनैद अजीम मट्टू ने कहा कि सेना प्रमुख के बयान से हालात और बिगड़ेंगे।

यहां का नौजवान अलग-थलग होकर रह गया है। इसलिए उसमें गुस्सा और दर्द इस हद तक बढ़ गया है कि आए दिन जब मुठभेडे़ं होती हैं तो वे मुठभेड़ स्थल पर जाकर प्रदर्शन करते हैं। इसलिए ऐसे बयान से वे डरने वाले नहीं, बल्कि और आक्रोश में आएंगे। मट्टू के अनुसार इसका उदाहरण 2016 में देखा गया, जब 100 से अधिक युवा मारे गए, उनके खिलाफ पैलेट गन इस्तेमाल की गई, लेकिन हिंसा का दौर नहीं थमा।       
 
सेना प्रमुख के इस बयान पर अलगाववादी नेता भी विरोध करते दिखाई दे रहे हैं। जेकेएलएफ चेयरमैन यासीन मलिक के अनुसार यह बयान बिना सूझबूझ के दिया गया है। ऐसे बयान से अगर समाज का एक तबका सहम जाएगा, लेकिन एक ऐसा तबका भी है, जिसे यह बयान आतंकवाद की राह पर चलने के लिए मजबूर करेगा।

मलिक का कहना है कि ऐसी धमकियों से आजादी की मुहिम खत्म नहीं बल्कि और तपेगी। हुर्रियत (ग) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी के अनुसार ऐसे बयान देने के बजाय उन्हें यह सोचना चाहिए कि आखिर क्या चीज है जो इन युवाओं को उकसाती है।      

यह दिया था बयान
सेना प्रमुख बिपिन रावत ने बुधवार को एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि सेना द्वारा आतंकियों के खिलाफ चलाए जाने वाले ऑपरेशनों के दौरान बाधा पहुंचाने वालों को आतंकियों का ओवरग्राउंड वर्कर माना जाएगा और उनके साथ वैसा ही बर्ताव किया जाएगा।       
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