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J&K: राज्यपाल की मेयर को लेकर की गई टिप्पणी पर हुआ विवाद, राजनीतिक पार्टियों ने किया विरोध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 09 Oct 2018 11:40 PM IST
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Governor Satyapal Malik
- फोटो : अमर उजाला
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक की ओर से श्रीनगर के अगले मेयर को लेकर दिए गए बयान से विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल एक टीवी चैनल से उन्होंने कहा था कि श्रीनगर का अगला मेयर विदेश से पढ़ा हुआ व्यक्ति बनेगा। इस बयान का अलगाववादियों समेत कांग्रेस व नेकां ने विरोध शुरू कर दिया है।
नेशनल कांफ्रेंस ने बुधवार को कहा कि राज्यपाल की ऐसी टिप्पणी एक खास व्यक्ति के पक्ष में है। श्रीनगर के बनने वाले मेयर के बारे में समय से पहले टिप्पणी चौंका देने वाली है। इससे राज्यपाल कार्यकाल की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। चुनाव प्रक्रिया राज्यपाल के कार्यालय की साजिशों को छिपाने के लिए एक पर्दे जैसे बनी है ताकि राज्य में लोकतांत्रिक संस्थानों को कुचला जा सके। पार्टी किसी भी व्यक्ति के मेयर बनने के विरोध में नहीं है पर राज्यपाल ने एक निजी न्यूज चैनल से स्पष्ट रूप से अपने इरादों को व्यक्त किया। किसी खास व्यक्ति की तरफ इशारा किया है जो इस पूरी चुनावी प्रक्रिया पर असर डाल सकता है। नेकां ने कहा कि राज्यपाल की टिप्पणियों से पता चलता है चुनाव प्रक्रिया का कोई सम्मान नहीं है।
कांग्रेस ने भी राज्यपाल की इस टिप्पणी को हैरान करने वाला बताया। कहा कि ऐसे बयानों से चल रहे निकाय चुनावों ने विश्वसनीयता खो दी है क्योंकि भाजपा-आरएसएस ने पहले से ही फैसला कर लिया है कि मेयर कौन होगा। पार्टी उपाध्यक्ष गुलाम नबी मोंगा ने कहा कि राज्यपाल राजभवन का संवैधानिक अधिकार संभालने में नाकाम हैं। राज्य का संवैधानिक मुखिया की हैसियत से बीजेपी और आरएसएस के हाथों में खेलना नहीं चाहिए। राज्यपाल को इस मामले में स्थिति साफ करनी चाहिए।
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अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा कि नकली हेराफेरी बेहूदा चुनाव। दर्शक तथा कश्मीर के दोस्त यह जानना चाहते हैं कि कैसे सत्यपाल मलिक ने यह जान लिया कि श्रीनगर का मेयर कौन होगा।
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नेशनल कांफ्रेंस ने बुधवार को कहा कि राज्यपाल की ऐसी टिप्पणी एक खास व्यक्ति के पक्ष में है। श्रीनगर के बनने वाले मेयर के बारे में समय से पहले टिप्पणी चौंका देने वाली है। इससे राज्यपाल कार्यकाल की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। चुनाव प्रक्रिया राज्यपाल के कार्यालय की साजिशों को छिपाने के लिए एक पर्दे जैसे बनी है ताकि राज्य में लोकतांत्रिक संस्थानों को कुचला जा सके। पार्टी किसी भी व्यक्ति के मेयर बनने के विरोध में नहीं है पर राज्यपाल ने एक निजी न्यूज चैनल से स्पष्ट रूप से अपने इरादों को व्यक्त किया। किसी खास व्यक्ति की तरफ इशारा किया है जो इस पूरी चुनावी प्रक्रिया पर असर डाल सकता है। नेकां ने कहा कि राज्यपाल की टिप्पणियों से पता चलता है चुनाव प्रक्रिया का कोई सम्मान नहीं है।
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कांग्रेस ने भी राज्यपाल की इस टिप्पणी को हैरान करने वाला बताया। कहा कि ऐसे बयानों से चल रहे निकाय चुनावों ने विश्वसनीयता खो दी है क्योंकि भाजपा-आरएसएस ने पहले से ही फैसला कर लिया है कि मेयर कौन होगा। पार्टी उपाध्यक्ष गुलाम नबी मोंगा ने कहा कि राज्यपाल राजभवन का संवैधानिक अधिकार संभालने में नाकाम हैं। राज्य का संवैधानिक मुखिया की हैसियत से बीजेपी और आरएसएस के हाथों में खेलना नहीं चाहिए। राज्यपाल को इस मामले में स्थिति साफ करनी चाहिए।
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अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा कि नकली हेराफेरी बेहूदा चुनाव। दर्शक तथा कश्मीर के दोस्त यह जानना चाहते हैं कि कैसे सत्यपाल मलिक ने यह जान लिया कि श्रीनगर का मेयर कौन होगा।