ओबामा दौरा: रिफ्यूजियों पर सियासत गरमाई
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पश्चिम पाक के शरणार्थियों को स्थायी नागरिकता देने की संसदीय समिति की सिफारिश पर रियासत की सियासत गरमा गई है। ओबामा के दौरे से पहले घाटी और जम्मू में इसके पक्ष और विपक्ष में प्रदर्शन हुए। घाटी आधारित क्षेत्रीय पार्टियां (नेकां और पीडीपी) खुलेआम इसके विरोध में हैं तो कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक फोरम और अवाम इतिहाद पार्टी के साथ ही अलगाववादियों ने सिफारिश का विरोध किया है। जम्मू में शरणार्थियों को उनका हक दिलाने के समर्थन में आवाज उठी है। भाजपा और हिंदुवादी संगठनों ने केंद्र सरकार की इस पहल का दिल खोलकर स्वागत किया है।
दरअसल, घाटी में हो रहा विरोध प्रदर्शन खास रणनीति के तहत है। ओबामा के दौरे से पहले इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन कर अंतर्राष्ट्रीय जगत का ध्यान आकृष्ट कराना मुख्य मकसद है ताकि केंद्र सरकार की पहल पर ब्रेक लग सके।
स्थानीय पार्टियों को सता रहा खतरा
संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि पश्चिमी पाक शरणार्थियों को स्थायी नागरिकता दी जाए। साथ ही उन्हें लोकसभा की ही तरह विधानसभा में भी वोटिंग का अधिकार मिले। उनकी संख्या के आधार पर नए विधानसभा सीटों का गठन किया जाए। इससे जम्मू संभाग में सात से आठ सीटें बढ़ सकतीं हैं।
घाटी में फिलहाल विधानसभा की 46, जम्मू में 37 एवं लद्दाख में चार सीटें हैं। इस प्रकार घाटी और जम्मू में विधानसभा की सीटें लगभग बराबर हो जाएंगी। इससे अब तक रहा क्षेत्रीय असंतुलन काफी हद तक खत्म हो जाएगा। सियासी पंडितों का कहना है कि दरअसल घाटी आधारित पार्टियों को अपनी जमीन दरकती नजर आने लगी है।
इस वजह से वे केंद्र के प्रयासों का विरोध कर रहीं हैं। उधर, नेकां और पीडीपी का तर्क है कि संसदीय समिति की सिफारिश से जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को आघात पहुंचेगा। यह रियासत की जनता में फूट डालने की भाजपा की साजिश है। इस प्रकार के प्रयास से रियासत में अमन चैन का माहौल खराब होगा।
भाजपा का मानना है कि पश्चिम पाक के शरणार्थी पांच दशक से भी अधिक समय से यहां रह रहे हैं। लेकिन, उन्हें मौलिक अधिकार नहीं मिला है। लंबे समय से वे लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।