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व्यापारी वर्ग को राहत देने वाला हो बजट
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सांबा। केंद्रीय वित्त मंत्री सीता रमण द्वारा पेश किए जाने आम बजट से लोगों की काफी उमीदें हैं। लोगों का कहना है कि आम बजट में आमतौर पर ऐसी वस्तुओं के दाम में वृद्धि की जाती है जो लोगों के रोजमर्रा इस्तेमाल की होती है। मसलन तेल, टूथपेस्ट, कपड़े, खाद्य सामग्री आदि महंगे किए जाते हैं। बजट ऐसा होना चाहिए जो व्यापारी वर्ग के साथ आमजन को राहत देने वाला होना चाहिए।
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महिला रीना चौधरी ने कहा कि पहले से ही महिलाओं का रसोई का बजट बिगड़ चुका है। महंगाई के चलते रसोई के हालात भी खराब हैं। आम गृहणियां परेशान हैं। सरकार को खानपान की वस्तुओं की कीमतों में कमी करनी चाहिए। गृहणियों को राहत देने बाला बजट लाना चाहिए।
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व्यापार मंडल के प्रधान तेजेंद्र सिंह ने बताया कि पहले शू मार्केट में एक हजार के जूते पर 5 प्रतिशत जीएसटी था। एक फरवरी से इसे बढ़ा कर 12 प्रतिशत कर दिया गया। इससे आम लोगों की जेब पर अधिक बोझा पडे़गा। उनके अनुसार आम लोग एक हजार से नीचे के जूते ही खरीदते हैं। अब जीएसटी के बढ़ जाने से जूते भी महंगे हो गए हैं। ऐसे में महंगाई की मार आम लोगों पर पड़ रही है। सरकार को आम लोगों की जेब का भी ख्याल रखना चाहिए। पहले से ही महंगाई काफी है। ऐसे में उन्हें तो कोई खास उम्मीद नहीं है आम बजट पर।
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रेडिमेड कपड़ों के दुकानदार अजय सिंह ने बताया कि दुकानदारों की पहले से ही कोरोना ने कमर तोड़ दी है। छोटे दुकानदारों का कारोबार पहले से ही खत्म हो गया है। कोरोना के दौरान लॉकडाउन में छोटे दुकानदारों की गुजर बसर मुश्किल हो गई है। बाजारों में मंदी है। सरकार को छोटे दुकानदारों को राहत देने वाला बजट पेश करना चाहिए।
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चश्मे का कारोबार करने वाले विकेश अंबा ने बताया कि जीएसटी के कारण अधिक महंगाई हो रही है। आम लोगों की जरूरी दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर सरकार को जीएसटी घटाना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले आम बजट पर कोई खास उमीद नहीं है।
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महिला रीना चौधरी ने कहा कि पहले से ही महिलाओं का रसोई का बजट बिगड़ चुका है। महंगाई के चलते रसोई के हालात भी खराब हैं। आम गृहणियां परेशान हैं। सरकार को खानपान की वस्तुओं की कीमतों में कमी करनी चाहिए। गृहणियों को राहत देने बाला बजट लाना चाहिए।
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व्यापार मंडल के प्रधान तेजेंद्र सिंह ने बताया कि पहले शू मार्केट में एक हजार के जूते पर 5 प्रतिशत जीएसटी था। एक फरवरी से इसे बढ़ा कर 12 प्रतिशत कर दिया गया। इससे आम लोगों की जेब पर अधिक बोझा पडे़गा। उनके अनुसार आम लोग एक हजार से नीचे के जूते ही खरीदते हैं। अब जीएसटी के बढ़ जाने से जूते भी महंगे हो गए हैं। ऐसे में महंगाई की मार आम लोगों पर पड़ रही है। सरकार को आम लोगों की जेब का भी ख्याल रखना चाहिए। पहले से ही महंगाई काफी है। ऐसे में उन्हें तो कोई खास उम्मीद नहीं है आम बजट पर।
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रेडिमेड कपड़ों के दुकानदार अजय सिंह ने बताया कि दुकानदारों की पहले से ही कोरोना ने कमर तोड़ दी है। छोटे दुकानदारों का कारोबार पहले से ही खत्म हो गया है। कोरोना के दौरान लॉकडाउन में छोटे दुकानदारों की गुजर बसर मुश्किल हो गई है। बाजारों में मंदी है। सरकार को छोटे दुकानदारों को राहत देने वाला बजट पेश करना चाहिए।
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चश्मे का कारोबार करने वाले विकेश अंबा ने बताया कि जीएसटी के कारण अधिक महंगाई हो रही है। आम लोगों की जरूरी दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर सरकार को जीएसटी घटाना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले आम बजट पर कोई खास उमीद नहीं है।