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अनुच्छेद 370 हटने पर सीमावर्ती गांवों में बनी हुई शांति
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सांबा। केंद्र की मोदी सरकार की ओर से दो वर्ष पूर्व अनुच्छेद 370 व 35ए को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को यूटी बना कर दो भागों में बांट दिया। इसका पाकिस्तान पर अधिक असर दिखाई दिया। जहां हर रोज पाकिस्तानी रेंजर भारतीय सरहदी इलाकों के ग्रामीणों पर गोलीबारी कर उन्हें परेशान करते थे।
कई बार सीमावर्ती गांवों के ग्रामीणों को पलायन तक करना पड़ता था। अब सीमा पर शांति बनने से ग्रामीण खुश हैं। भारत-पाक सीमा के साथ सटी पंचायत चक दुल्मा के सरपंच विनय शर्मा, गांव चक सद्दा के नंबरदार राजकुमार, पंच निशा रानी, मंगुचक के बलवीर सिंह आदि का कहना था कि 370 के हटने के बाद पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी में कमी आई है। पहले वह खेत में काम करने के लिए भी कई बार सोचते थे, लेकिन अब वेे बेखौफ खेतों में पहुंच रहे हैं। तारबंदी के आगे की बंजर भूमि को बीएसएफ की ओर से काश्त के योग्य बनाया गया है। कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल भी लगाई गई।
ग्रामीणों के अनुसार तारबंदी के आगे भूमि को आबाद किया गया है, लेकिन वहां जाने के लिए सुरक्षा बलों के सहयोग की जरूरत अधिक चाहिए। सीमावर्ती गांवों के ग्रामीण पहले गांव को छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर अपना मकान बनाने की सोचते थे, लेकिन अब गांव में ही नए मकान बना रहे हैं। यह सारा 370 के हटने का ही असर है। वहीं नए विकास कार्यों में भी तेजी आई है। विजयपुर में बनने वाला एम्स की रफ्तार कई गुणा बढ़ गई है। इमारतें बनाने का काम जोरों पर चल रहा है। डीडीसी के सदस्यों को अलग से फंड दिए जाने से विकास की गति भी तेज हुई है।
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कई बार सीमावर्ती गांवों के ग्रामीणों को पलायन तक करना पड़ता था। अब सीमा पर शांति बनने से ग्रामीण खुश हैं। भारत-पाक सीमा के साथ सटी पंचायत चक दुल्मा के सरपंच विनय शर्मा, गांव चक सद्दा के नंबरदार राजकुमार, पंच निशा रानी, मंगुचक के बलवीर सिंह आदि का कहना था कि 370 के हटने के बाद पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी में कमी आई है। पहले वह खेत में काम करने के लिए भी कई बार सोचते थे, लेकिन अब वेे बेखौफ खेतों में पहुंच रहे हैं। तारबंदी के आगे की बंजर भूमि को बीएसएफ की ओर से काश्त के योग्य बनाया गया है। कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल भी लगाई गई।
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ग्रामीणों के अनुसार तारबंदी के आगे भूमि को आबाद किया गया है, लेकिन वहां जाने के लिए सुरक्षा बलों के सहयोग की जरूरत अधिक चाहिए। सीमावर्ती गांवों के ग्रामीण पहले गांव को छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर अपना मकान बनाने की सोचते थे, लेकिन अब गांव में ही नए मकान बना रहे हैं। यह सारा 370 के हटने का ही असर है। वहीं नए विकास कार्यों में भी तेजी आई है। विजयपुर में बनने वाला एम्स की रफ्तार कई गुणा बढ़ गई है। इमारतें बनाने का काम जोरों पर चल रहा है। डीडीसी के सदस्यों को अलग से फंड दिए जाने से विकास की गति भी तेज हुई है।
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