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जाटों को ओबीसी का दर्जा देने का वादा पूरा करे सरकार
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जम्मू/ ज्यौड़ियां। अखिल भारतीय जाट महासभा के अध्यक्ष और पूर्व मेयर मनमोहन सिंह ने सोमवार को कई राज्यों की तर्ज पर प्रदेश में जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने की मांग दोहराई। उन्होंने जम्मू के कुंजवानी में महासभा की बैठक की और अध्यक्षता करते हुए यह मांग उठाई। बैठक का आयोजन महासभा के जिलाध्यक्ष सुनील सोनू सीए ने किया।
मनमोहन ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने एक इंटरव्यू में कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने जाटों सहित विभिन्न समुदायों को ओबीसी का दर्जा देने के लिए केंद्र को रिपोर्ट सौंप दी है और उसी का समर्थन किया गया है। उन्होंने मांग की कि भाजपा को अब यह वादा पूरा करना चाहिए। क्योंकि प्रदेश में पांच लाख से अधिक जाटों को ओबीसी का दर्जा पाने के उनके अधिकार से वंचित किया गया है। उन्होंने जाटों को ओबीसी का दर्जा देने का आश्वासन देने वाले रवींद्र रैना के बयान का स्वागत किया।
पूर्व मेयर ने कहा कि वे न केवल जम्मू-कश्मीर में बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी रैलियां और सम्मेलन करके 2014 से लड़ रहे हैं। इसके कारण प्रदेश में हर जाट अपने अधिकार और ओबीसी स्थिति के लाभों से अवगत है। मनमोहन सिंह ने कहा कि अधिकांश जाट सीमाओं पर रह रहे हैं, और रक्षा की पहली पंक्ति बन रहे हैं। वे पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं। उन्होंने जम्मू जिले के जाटों से एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने की अपील की।
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बैठक में मास्टर हरभजन सिंह, मास्टर सुरैन सिंह, मास्टर देवी सिंह, एस. मनमोहन सिंह सरकारिया, सुरजीत सिंह, एस. बलदेव सिंह, सीए सुनील चौधरी, बलजीत सिंह (काका), राज कुमार सिंह, सुरिंदर सिंह (शिंदा), एस. सरबजीत सिंह (सरपंच), एस. जदगीश सिंह (नट्टी), मोहिंदर सिंह, सुरजीत सिंह, जगदीश सिंह रंधावा (बिट्टू) और भगवान सिंह उपस्थित थे।
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मनमोहन ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने एक इंटरव्यू में कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने जाटों सहित विभिन्न समुदायों को ओबीसी का दर्जा देने के लिए केंद्र को रिपोर्ट सौंप दी है और उसी का समर्थन किया गया है। उन्होंने मांग की कि भाजपा को अब यह वादा पूरा करना चाहिए। क्योंकि प्रदेश में पांच लाख से अधिक जाटों को ओबीसी का दर्जा पाने के उनके अधिकार से वंचित किया गया है। उन्होंने जाटों को ओबीसी का दर्जा देने का आश्वासन देने वाले रवींद्र रैना के बयान का स्वागत किया।
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पूर्व मेयर ने कहा कि वे न केवल जम्मू-कश्मीर में बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी रैलियां और सम्मेलन करके 2014 से लड़ रहे हैं। इसके कारण प्रदेश में हर जाट अपने अधिकार और ओबीसी स्थिति के लाभों से अवगत है। मनमोहन सिंह ने कहा कि अधिकांश जाट सीमाओं पर रह रहे हैं, और रक्षा की पहली पंक्ति बन रहे हैं। वे पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं। उन्होंने जम्मू जिले के जाटों से एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने की अपील की।
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बैठक में मास्टर हरभजन सिंह, मास्टर सुरैन सिंह, मास्टर देवी सिंह, एस. मनमोहन सिंह सरकारिया, सुरजीत सिंह, एस. बलदेव सिंह, सीए सुनील चौधरी, बलजीत सिंह (काका), राज कुमार सिंह, सुरिंदर सिंह (शिंदा), एस. सरबजीत सिंह (सरपंच), एस. जदगीश सिंह (नट्टी), मोहिंदर सिंह, सुरजीत सिंह, जगदीश सिंह रंधावा (बिट्टू) और भगवान सिंह उपस्थित थे।