बरसात के नाम से भी डरने लगे हैं यहां के लोग
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पिछले वर्ष सितंबर महीने में आई बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए टूटे पुलों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। न ही उन पुलों की मरम्मत हुई, जिनमें दरारें आ गई थी। यहीं कारण है कि, अभी मानसून आने में लगभग एक महीना पड़ा हुआ है, लेकिन लोगों की चिंताएं अभी से शुरू हो गई हैं। लोगों को डर सताने लगा है कि बरसात में उन लोगों की आवाजाही कैसे होगी।
क्योंकि अधिकतर पुलों के टूटने पर अस्थायी रास्ते बनाए गए हैं, जो बरसात की मार नहीं झेल पाएंगे। जम्मू संभाग के करीब एक दर्जन पुल सितंबर की बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। इनमें चार पुल मुख्य रूप से शामिल हैं, जो पुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अलावा कई ऐसे पुल हैं, जिनके बीच दरारें आ गई। यह पुल बरसात की मार नहीं झेल पाएंगे।
दो बार बहा बरजाला चक पुल
50 गांव के 47000 लोगों को जोड़ने वाला बरजाला चक का पुल सितंबर की बाढ़ में बह गया था। इसके बाद सेना की ओर से अस्थायी पुल बनाया गया, जो दो महीने पहले आई बाढ़ में बह गया। मौजूदा समय में लोग भगवती नगर के चौथे पुल से निकलने वाले तवी नदी के बीचो बीच बनाए गए मार्ग से होकर निकलते हैं।
बरसात आने पर यह रास्ता भी तवी नदी की चपेट में होगा और लोगों के लिए निकलने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। अभी तक इस पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। यहां तक के पीडब्लयूडी विभाग के चीफ इंजीनियर को भी इसके बारे में नहीं पता कि पुल बन रहा है या नहीं।
पुंछ का मुख्य पुल
बाढ़ में यह पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया था। यह पुल पुंछ को जोड़ता है। लेकिन अभी तक इसका निर्माण नहीं हुआ है। अभी लोग एक लोहे के पुल से वाया नंगाली साहिब मार्ग से पुंछ पहुंचते हैं। यहां भी एक अन्य पुल है, जो बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसके ऊपर से ही वाहन निकलते हैं। बाढ़ की मार यह पुल भी नहीं झेल पाएगा। ऐसे में यहां रहने वाले लोगों को अभी से चिंता सता रही है, बरसात में वह कैसे रहेंगे।
बरसात में फिर बहेगा बुद्धल पुल
राजोरी के बुद्दल में अंस नदी पर बना पुल भी बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसका निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ। सेना की ओर से इस पुल का एक हिस्सा लोहे से तैयार किया गया है, जिससे यातायात बहाल है। लेकिन एक अन्य हिस्सा दरारें खा चुका हैं, जो बरसात की मार नहीं सह सकेगा।
भगवती नगर का निर्माण कार्य भी नहीं शुरू हुआ
दो बार की बाढ़ की मार से तहस नहस हुआ भगवती नगर पुल भी बरसात की मार नहीं झेल पाएगा। इसका एक हिस्सा 2014 सितंबर महीने की बाढ़ में बह गया। इसके बाद मलवे से भरकर पुल को शुरू किया गया।
लेकिन दो महीने पहले आई बाढ़ में यह मलवा बह गया। इसके बाद सरकार ने इस पुल पर आठ करोड़ रुपये खर्च कर दोबारा पुल बनाने का निर्णय लिया। लेकिन अभी तक इसका काम नहीं शुरू हुआ।
बलोल पुल में आई दरारें
आरएस पुरा को जोड़्ने वाले गाढीगढ़ के मुख्य बलोल पुल के नीचे भी दरारें आ चुकी हैं। यह पुल कभी भी ढह सकता है।
बरसात से पहले कर देंगे तैयार
पीडब्लयूडी विभाग के चीफ इंजीनियर अब्दुल हमीद का कहना है कि जिन पुलों को मरम्मत की आवश्यकता थी, उनकी बरसात से पहले मरम्मत कर ली जाएगी। हालांकि टूटे पुलों के निर्माण कार्य के शुरू होने पर उन्होंने कहा कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।