पांपोर में एडवाइजरी जारी करने के बाद भी लोग सड़क पर उतरे: IGP
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कश्मीर घाटी में हाल की कुछ मुठभेड़ों के दौरान चौंकाने वाली स्थितियां सामने आई हैं। एक ओर आतंकी सुरक्षा बलों को चुनौती देते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों के लिए एक और चुनौती होती है प्रदर्शन करने वालों से निपटना। ताजा उदाहरण है पांपोर में तीन दिनों तक चली भीषण मुठभेड़ के दौरान लोगों का सड़क पर उतरना।
श्रीनगर से करीब 13 किलोमीटर दूर पांपोर में स्थित ईडीआई इमारत जहां तीन दिन तक सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी थी, वहीं इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मुठभेड़ स्थल के करीब प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे थे।
जिस दिन मुठभेड़ शुरू हुई उसी दिन से युवा विरोध प्रदर्शन करते दिखे। इस दौरान सुरक्षा बलों के साथ भिड़ंत भी जारी रही। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े। पेलेट गन का भी प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए।
कई इलाकों में जमकर पत्थरबाजी भी की गई
हद तो तब हुई जब ऑपरेशन के आखिरी चरण में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा मुठभेड़ स्थल के करीब आने की कोशिश करने लगे। पांपोर के आसपास के कई इलाकों में जमकर पत्थरबाजी भी की गई। उनकी कोशिश यही रही कि किसी तरह से मुठभेड़ स्थल तक पहुंचा जा सके।
पांपोर में मुठभेड़ के दौरान तैनात एक पुलिस अधिकारी के अनुसार दो तरफा चुनौती थी। एक तरफ आतंकियों के खिलाफ लड़ाई, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों से निपटना। इनके खिलाफ फूंक फूंक कर कदम उठाने पड़े, ताकि कोई जानी नुकसान न हो।
उन्होंने कहा कि लोगों को जान खतरे में नहीं डालनी चाहिए, खासकर युवाओं को। पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार मुठभेड़ स्थल के दो किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लागू हो जाती है।
आतंकी प्रदर्शनों का फायदा उठाते हुए फरार होने में सफल रहे
अधिकारी के अनुसार यह नया तौर तरीका है, जिसके जरिये लोग आतंकियों के प्रति एकजुटता दिखाना चाहते हैं। मुठभेड़ स्थलों पर लोगों द्वारा ऐसे तरीके को अपनाना चिंता का विषय है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी एसजेएम गिलानी इसे गंभीर मानते हैं। गिलानी के अनुसार यह हमारे लिए दोहरी चुनौती बन जाती है।
गौरतलब है कि दक्षिणी कश्मीर में कुछ मुठभेड़ों के दौरान आतंकी प्रदर्शनों का फायदा उठाते हुए फरार होने में सफल रहे हैं। पुलवामा जिले में एक मुठभेड़ के दौरान दो नागरिकों की मौत के बाद सेना और पुलिस की काफी आलोचना हुई थी, जिसके बाद एडवाइजरी को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया था।