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खौफ के साए में घरों से दूर मनी सरहदी इलाकों के लोगों की दिवाली
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Mon, 31 Oct 2016 08:54 PM IST
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सीमांत इलाकों में मनी दिवाली
- फोटो : AmarUjala
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दिवाली पर सरहदी गांवों के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी करने की आशंका के चलते सीमावर्ती गांवों के ज्यादातर लोगों ने इस बार रोशनी का पर्व राहत शिविरों और रिश्तेदारों के घरों पर ही मनाया। घरों से दूर रहकर दिवाली मनाने का मलाल लोगों को जरूर रहा, लेकिन त्योहार की खुशियां एक-दूसरे से पूरे जोश और उल्लास से साझा की गईं।
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प्रशासन की ओर से कई राहत शिविरों में बच्चों को मिठाई और पटाखे वितरण कर लोगों के चेहरों पर खुशी लाने का प्रयास किया गया। सांबा सेक्टर के सरहद से सटे गांव रिगाल के लोगों ने धार्मिक स्थल तरेली में बने राहत शिविर में दिवाली का पर्व एक साथ मिलकर मनाया।
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इस अवसर पर कांता देवी ने कहा कि पाकिस्तान पिछले कई साल से दिवाली के आसपास गोलाबारी शुरू कर देता है। घरों में बच्चों के साथ रहना खतरनाक है। ऐसे में लोगों को मजबूरी में राहत शिविरों या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी है।
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कई सीमावर्ती लोग नहीं मना पाए दीपावली
सीमावर्ती लोग नहीं मना पाए दीपावली
- फोटो : Demp Pic.
चीची माता मंदिर, नृसिंह धाम घगवाल में बने राहत शिविरों में भी लोगों ने दिवाली पूरे उल्लास के साथ मनाई। लोगों ने कहा दिवाली का पर्व लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा है।
आरएस पुरा सेक्टर के पाक गोलाबारी की जद में आने वाले गांवों में भी दिवाली पर ज्यादातर लोगों ने अपने बच्चों को राहत शिविरों व रिश्तेदारों के घर भेज दिया। गांवों में कुछ एक बुजुर्ग जरूर रहे।
सरहदी इलाकों के कई लोग दिवाली का पर्व नहीं मना पाए। ऐसे लोगों का कहना था कि गोलाबारी से लोगों की जान गई है। कई घायल हुए हैं। मवेशियों की जान चली गई है। ऐसी स्थिति में दिवाली का पर्व वह नहीं मना पाए।
आरएस पुरा सेक्टर के पाक गोलाबारी की जद में आने वाले गांवों में भी दिवाली पर ज्यादातर लोगों ने अपने बच्चों को राहत शिविरों व रिश्तेदारों के घर भेज दिया। गांवों में कुछ एक बुजुर्ग जरूर रहे।
सरहदी इलाकों के कई लोग दिवाली का पर्व नहीं मना पाए। ऐसे लोगों का कहना था कि गोलाबारी से लोगों की जान गई है। कई घायल हुए हैं। मवेशियों की जान चली गई है। ऐसी स्थिति में दिवाली का पर्व वह नहीं मना पाए।