जम्मू-कश्मीर: भूस्खलन से डरे हुए हैं लोग
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जम्मू-कश्मीर में लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, मौसम विभाग ने राज्य में अगले तीन दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। राज्य के बडगाम ज़िले के लादन गांव में 30 मार्च को भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से 16 लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। मरने वालों में एक नवजात भी शामिल था।
भूस्खलन की चपेट में करीब छह घर आए थे। इनमें से दो घर मलबे में पूरी तरह दब गए थे। इस घटना में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से 11 गुलाम नबी हाजम के परिवार के सदस्य थे। गांव के ही गुलाम दीन हाजम 30 मार्च की सुबह घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल थे।
उन्होंने बताया कि रात करीब एक बजे एक तेज धमाके की आवाज़ सुनकर वो जाग गए थे, लेकिन बारिश और डर की वजह से न तो वो, न तो कोई और घटनास्थल पर पहुंच पाया।
उजड़ा हुआ इलाका
गुलाम दीन कहते हैं, 'अगली सुबह जब हम वहां पहुँचे तो हमने देखा कि वह छोटा इलाका उजड़ा हुआ था। वहां कोई और नहीं था, जो कि मदद के लिए आता।'
भूस्खलन की चपेट में आकर बहुत से पशु मारे गए और पशुओं के बाड़े तबाह हो गए। संचार का साधन न होने और खराब सड़क की वजह से कोई प्रशासनिक अधिकारी समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाया। अगर समय पर लोग वहां पहुंच जाते तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
स्थानीय नागरिक 75 साल के सईब दीन का कहना है कि उन्होंने पहली बार इस तीव्रता का भूस्खलन देखा है। वो कहते हैं, 'मेरा घर भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है। हमने दूसरे गांव में रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हम कैसे यहां दोबारा आकर यहां रहें।'
सईब दीन कहते हैं कि भूस्खलन की भयानक आवाज़ सुनकर उनकी नीद खुली। इस आवाज से उनका घर भी हिल गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि सितंबर 2014 में श्रीनगर में आई बाढ़ में इस गांव के युवक राहत और बचाव अभियान में शामिल थे।
भूस्खलन से डरे लोगों ने घर छोड़े
भूस्खलन से स्थानीय लोग डरे हुए हैं। अधिकांश लोगों ने अपना घर-बार छोड़कर दूसरी जगह शरण ली है।उनकी शिकायत है कि स्थानीय प्रशासन ने प्रभावितों को राहत के लिए अधिक कुछ नहीं किया। भूस्खलन के मलबे में दबकर 16 लोगों की मौत हुई। इनमें से 11 एक ही परिवार के सदस्य हैं।
स्थानीय नागरिक मुश्ताक चौधरी घटना को याद करते हुए कहते हैं कि करीब आधी रात को उन्होंने तेज़ धमाका सुना और अपने घर में कंपन महसूस किया, जो कि घटनास्थल से कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित है।
वो कहते हैं, 'तेज़ धमाके की आवाज़ सुनकर वो लोग जाग गए। पहले तो हमें पता नहीं चला कि आखिर हुआ क्या है। लेकिन बाद में भूस्खलन का अहसास होने पर हम डर गए और अपने घरों को छोड़ दिया।'लादन से सटे नीलांग, वटकुल, वादीपोरा और ब्रिंजन में भी भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं।