अफस्पा पर नरम पड़ी पीडीपी, मुफ्ती हुए खामोश
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निकटता बढ़ाने के लिए पीडीपी अब अफस्पा पर नरम पड़ गई है। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के दो दिवसीय दौरे के क्रम में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने इस मुद्दे पर खामोशी ओढ़ ली। मुफ्ती की परिकर से मुलाकात के लिए तैयार एजेंडे में पहले अफस्पा की वापसी के मुद्दे को शामिल किया गया था।
लेकिन, मुलाकात से ऐन पहले इस मुद्दे को हटा दिया गया। अफस्पा की वापसी का मुद्दा भाजपा-पीडीपी के गठबंधन एजेंडे में भी शुमार है। न्यूनतम साझा कार्यक्रम में अफस्पा की वापसी की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने की बात कही गई है। दो दिवसीय दौरे में रक्षा मंत्री परिकर ने सियाचीन से लेकर भारत-पाक नियंत्रण रेखा तक का जायजा लिया।
सेना के कमांडरों से फीडबैक लेकर उन्होंने अमरनाथ यात्रा और सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की। राज्यपाल एनएन वोहरा ने परिकर से एयरपोर्ट विस्तार पर बातचीत की। मुफ्ती ने श्रीनगर के टोटा मैदान को खाली करने का मुद्दा उठाया।
विवादित रहा है यह मुद्दा
इसके अलावा जम्मू और कारगिल एयरपोर्ट का विस्तार, श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुविधाओं में बढ़ोतरी, सेना की कब्जे वाली जमीन का किराया बढ़ाने, सेना के कब्जे से भवनों को खाली कराने जैसे मुद्दे ही वार्ता के केंद्र में रहे। अफस्पा की वापसी के मुद्दे को किसी स्तर पर नहीं उठाया गया।
गौरतलब है कि पहले पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता महबूब बेग ने परिकर के दौरे में अफस्पा की वापसी के मुद्दे को उठाए जाने के संकेत दिए थे। इससे पहले अप्रैल में यूनिफाइड कमांड की बैठक में मुख्यमंत्री मुफ्ती ने सेना कमांडरों से इस मुद्दे पर बातचीत की थी। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने जम्मू और श्रीनगर से अफस्पा की आंशिक वापसी की शुरुआत करने का सुझाव दिया था।
बाद में सेना कमांडरों ने 15 अप्रैल को उधमपुर में आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग को इस संबंध में जानकारी दी थी। फिलहाल अफस्पा वापसी पर सेना का ऐतराज रहा है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुरुआती दिनों में मुफ्ती के तेवर अलगाववादियों के प्रति नरम रहे। इससे समस्याएं बढ़ीं।
अपनी जिद नहीं थोप पा रहे हैं मुफ्ती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर नाराजगी जताई थी। अब मुफ्ती को महसूस होने लगा है कि गठबंधन सरकार में वह सिर्फ पीडीपी के एजेंडे को आगे बढ़ाने की जिद नहीं थोप सकते। लिहाजा, गठबंधन एजेंडे को लागू करने पर केंद्र से बातचीत के लिए बनाई गई कैबिनेट सब कमेटी में भाजपा के उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह को ही अध्यक्ष बनाया।
जम्मू कश्मीर के विकास के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने और गुलमर्ग को स्विटजरलैंड के दावोस की तरह विकसित करने में मुफ्ती अब मोदी के करिश्मे का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
मुफ्ती को लगता है कि मोदी के नाम पर ही विदेशी कंपनियां आकर्षित हो सकती हैं। उन्हें इस बात का भी अहसास है कि केंद्र की उदार मदद के बगैर उनका कोई चुनावी वादा पूरा नहीं हो सकता। लिहाजा, मोदी से निकटता बढ़ाने की कवायद तेज है।