कश्मीर में अमन के लिए हुर्रियत के बिना वार्ता का कोई मतलब नहीं: PDP
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा के अलगाववादियों से बातचीत की संभावना को खारिज किए जाने के बयान के बाद अब पीडीपी ने भाजपा को एजेंडा आफ एलायंस की वचनबद्धता की याद दिलाई है। पीडीपी उपाध्यक्ष सरताज मदनी ने कहा है कि कश्मीर में अमन के लिए हुर्रियत के बिना किसी वार्ता का कोई मतलब नहीं होगा।
मदनी ने कहा कि एजेंडा आफ एलायंस में सिर्फ हुर्रियत से ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान से भी बातचीत की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 2002 से 2005 तक की अवधि में हुर्रियत और पाकिस्तान से बातचीत कर कश्मीर में अमन के लिए सार्थक प्रयास किया था। इस अवधि के दौरान विकास और राजनीतिक स्थिरता और शांति भी रही।
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में भी सुधार आया। यही पृष्ठभूमि पीडीपी और भाजपा के गठबंधन का आधार बनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने व्यापक जनादेश के बूते कश्मीर समस्या के समाधान में सफल होंगे और इसके लिए वाजपेयी की नीतियों का अनुसरण करेंगे। मदनी ने भाजपा के स्थानीय और राष्ट्रीय नेताओं के हुर्रियत और पाकिस्तान से वार्ता न करने के बयानों पर भी निराशा जताई है।
टकराव के वातावरण से रियासत को होता है नुकसान
मदनी ने कहा है कि मुख्य राजनीतिक मुद्दों में सुलह और समझने के रास्तों को बंद करने का विचार शांति प्रक्रिया में बाधा डालता है और जनहित में नहीं है। पीडीपी और भाजपा में एजेंडा आफ एलायंस को मदनी ने आशा का एजेंडा बताते हुए कहा कि इसमें अलगाववादियों और पाकिस्तान समेत सभी तक पहुंचने का वादा भी शामिल है।
मदनी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान के अचानक दौरे से शांति और राजनीतिक प्रक्रिया ने एक बार फिर गति पकड़ी थी, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के चलते यह सब रुक गया। मदनी ने कहा है टकराव भरे वातावरण से केवल लोगों की समस्याएं बढ़ती हैं और जम्मू कश्मीर को नुकसान होता है।
युद्ध और टकराव से किसी को लाभ नहीं होता है। उन्होंने आशा प्रकट की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारी जनमत का प्रयोग करते हुए नए सिरे से शांति की तरफ कदम बढ़ाएंगे, ताकि जम्मू कश्मीर रियासत को मौजूदा खराब दौर से बाहर निकाला जा सके।