रियासत में नई सरकार जल्द, अफस्पा पर झुकी भाजपा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा और पीडीपी के वार्ताकारों में मैराथन अनौपचारिक बातचीत अब अंतिम दौर में है। दिल्ली चुनाव में करारी हार के बाद भाजपा का रुख नरम हुआ है और अब अफस्पा की क्रमबद्ध वापसी को न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) में शामिल किया जा रहा है। पीडीपी अफस्पा के मुद्दे पर झुकने को तैयार नहीं थी लिहाजा भाजपा ने लचीला रुख अपनाया।
खास क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने पर संबंधित इलाके से अफस्पा की वापसी पर भाजपा सहमत हो गई है। यूपीए सरकार का भी इस मुद्दे पर यही स्टैंड था। पेंच सुलझने के बाद अब औपचारिक वार्ता की बाधाएं समाप्त होती दिख रही हैं। पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात जल्द हो सकती है।
इस मुलाकात और टेबुल पर बातचीत की औपचारिकता के बाद इस माह के अंत तक मुफ्ती नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं।
अफस्पा पर अड़ी रही पीडीपी
पीडीपी ने अफजल गुरु की फांसी की बरसी 9 फरवरी और मकबूल भट की फांसी की बरसी 11 फरवरी तक किसी भी तरह की औपचारिक वातचीत में शामिल होने से इनकार किया था। अब दोनों तिथियां गुजर चुकी हैं।
लेकिन इस दौरान कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोली से एक व्यक्ति की मौत के उत्पन्न तनाव ने पीडीपी को धीमी गति से बढ़ने को मजबूर किया। दिल्ली चुनाव में भाजपा की हार के बाद पीडीपी के मुफ्ती ने मोदी को विघटनकारी ताकतों पर लगाम लगाने की नसीहत दी और अफस्पा पर अपना अपने स्टैंड पर बल दिया।
इस बीच नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की एकजुटता से राज्यसभा चुनाव में गुलाम नबी आजाद की जीत ने भाजपा-पीडीपी के समक्ष जल्द सरकार गठन की सियासी मजबूरी पैदा कर दी थी।
पीडीपी सूत्रों का कहना है कि अब सारी बाधाएं खत्म होती दिख रही हैं। पीडीपी ने भाजपा से औपचारिक वार्ता के लिए पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम गठित कर दी है।
मुफ्ती छह साल के लिए मुख्यमंत्री होंगे
भाजपा ने अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर खामोश रहने के मन बनाया है। पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को नागरिकता पर पीडीपी के कड़े विरोध से यह मुद्दा भी फिलहाल टाल दिया गया है। दिल्ली चुनाव में हार के बाद जम्मू कश्मीर में सरकार का गठन भाजपा की प्राथमिकता में ऊपर आ गया है लिहाजा विवादास्पद मुद्दों को दरकिनार कर विकास के मूल मंत्र पर आधारित न्यूनतम साझा कार्यक्रम को समझौते का आधार बनाया जा रहा है।
मुफ्ती छह साल के लिए मुख्यमंत्री होंगे
पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद पूरे छह साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री होंगे। भाजपा रोटेशनल सीएम के मुद्दे पर अब जोर नहीं दे रही है। भाजपा को डिप्टी सीएम और विधानसभा अध्यक्ष का पद मिलेगा। डिप्टी सीएम के लिए भाजपा के निर्मल सिंह और स्पीकर पद के लिए बालि भगत के नाम की चर्चा है। दोनों दलों से कैबिनेट रैंक के सात-सात मंत्री होंगे। इसी तरह स्टेट रैंक के मंत्रियों की संख्या पांच-पांच होगी।
विधान परिषद की सीटें हासिल करने की रणनीति
विधान परिषद चुनाव की तारीख ने भी भाजपा-पीडीपी को जल्द समझौते पर मजबूर किया। 11 सीटों पर 2 मार्च को चुनाव है। भाजपा-पीडीपी गठबंधन अधिकांश सीटों पर काबिज होना चाहता है लिहाजा आधिकारिक समझौता जरूर हो गया है।