'पठानकोट में हमले से प्रभावित नहीं होनी चाहिए वार्ता’
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भारत-पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता को लेकर जम्मू-कश्मीर में भी राजनीति गरमा गई है। मुख्यधारा की अधिकतर राजनीतिक पार्टियां वार्ता के हक में हैं।
भाजपा ने भी वार्ता जारी रखने पर हामी भरी है। लेकिन, साफशब्दों में यह भी कहा है कि शांति प्रक्रिया के दौरान आतंकवाद कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्य की गठबंधन सरकार में शामिल पीडीपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह एक अच्छी सूझबूझ वाले नेता हैं और अच्छी तरह जानते हैं कि वह जो कुछ करेंगे, देशहित में करेंगे। वह विदेश नीति को लेकर काफी गंभीर हैं।
मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार वहीद-उर-रहमान पर्रा ने कहा कि हम इस बात से सहमत हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद एक बड़ी समस्या है।
उन्होंने कहा पाकिस्तान के भीतर शांति विरोधी साजिश है, लेकिन जिस तरह से शांति बहाली में भारत दक्षिण एशियाई देशों के साथ दुनिया के बाकी हिस्सों में एक रोल मॉडल के रूप में उभर रहा है, तो इसलिए क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए यह जिम्मेदारी भारत पर आती है।
कश्मीर को झेलना पड़ता हे बहुत कुछ
वहीद ने बताया कि हम इसलिए नहीं वार्ता कर रहे कि यह पाकिस्तान की भलाई के लिए है, बल्कि इसलिए कर रहे कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में सुधार चाहते हैं।
यह राष्ट्रीय हित में लाभदायक है। इसलिए भी वार्ता करने को दबाव डालते हैं, क्योंकि पिछले 60 वर्षों से पिस्ते चले आ रहे हैं। कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ते हैं, तो कश्मीर को बहुत कुछ झेलना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पठानकोट हमले के शहीदों को सलाम करते हैं। उनके परिवारों से पूरी सहानुभूति है। वहीद ने कहा कि ऐसा माहौल बनना चाहिए कि वार्ता आतंकवाद पर प्रबल हो, न कि आतंकवाद वार्ता पर।
यह भी कहा कि एक समय में बातचीत और आतंक मुश्किल है। अब हमें यह सोचना होगा कि किस पाकिस्तान के साथ वार्ता के लिए आगे हाथ बढ़ाएं।
उसके साथ जो बातचीत के खिलाफ है, या फिर उसके साथ जो शांति प्रक्रिया में भाग लेना चाहता है, क्योंकि वह खुद आंतरिक तौर पर आतंकवाद का शिकार है।
वहीद ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश की सहायता की। अफगानिस्तान की सहायता की। नेपाल की सहायता की। कहा कि अब वक्त आ गया है हाथ बढ़ाने का, और पाकिस्तान को अपने साथ लेकर चलने का।
हर कोई वार्ता के हक में
राज्य की मुख्य विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस भी वार्ता के हक में है। नेकां के प्रवक्ता जुनैद अजीम मट्टू ने पठानकोट हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमलों का असर दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ता पर नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में ही कहा था कि जब भी कभी भारत-पाकिस्तान नजदीक आने का प्रयास करेंगे, तो ऐसे तत्व जो दोनों देशों के बीच शांति नहीं चाहते, बड़ी घटना को अंजाम देकर दरार डालने की कोशिश करेंगे। पठानकोट हमला भी उसका एक उदाहरण है।
वहीं भाजपा ने जहां एक ओर वार्ता को जारी रखने के लिए कहा है, वहीं कड़े शब्दों में यह भी कहा कि देश में आतंकवाद कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा विधायक रविंद्र रैणा ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र में बातचीत की अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी खुद बस में बैठकर लाहौर गए थे। अब मोदी का अचानक से कराची में नवाज शरीफ से मिलना यह साफकरता है कि भारत सकारात्मक वार्ता के पक्ष में है।
लेकिन, पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि वहां सरकार से ज्यादा आईएसआई, पाकिस्तानी सेना का पलड़ा भारी है, जो आतंकियों को सहायता करते हैं।
उन्होंने कड़े शब्दों में पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वार्ता के दौरान आतंकियों ने कोई खलल डालने की कोशिश की, तो नतीजा बुरा होगा। रैणा ने कहा कि अगर किसी भी हिंदुस्तानी का एक बूंद खून बहा, तो मुंहतोड़ जवाब देकर दस बूंद उनके बहाए जाएंगे।