शुजात बुखारी की हत्या में पाकिस्तानी आतंकी शामिल, 2 कश्मीरी सहित 3 हत्यारों की शिनाख्त की
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घटना की जांच के लिए गठित एसआईटी ने फोरेंसिक विभाग की ओर से मौके से एकत्र सबूतों व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू की। मीडिया रिपोटर्स को भी जांच का आधार बनाया गया। हाल में कुलगाम में एक मुठभेड़ की जांच के दौरान शुजात की हत्या के योजना का पता चला था।
पुलिस को जांच के दौरान यह पता चला था कि हत्या में जट शामिल रहा है। घटना के बाद पुलिस की ओर से जारी सीसीटीवी फुटेज में मोटरसाइकिल पर बीच में बैठे आतंकी को नवीद जट माना जा रहा है। कलाई में काला बैंड, मेकअप तथा शारीरिक डीलडौल आतंकी जट से मिलते जुलते हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान हत्या में पाक कनेक्शन सामने आने के बाद जांच को और गंभीरतापूर्वक किया गया। यह पता चला कि पाकिस्तान की शह पर ही आतंकियों ने शुजात की हत्या की है। शुजात को पाकिस्तान के साथ ट्रैक टू डिप्लोमेसी के तहत शांति प्रक्रिया में बातचीत का हिमायती माना जाता रहा है।
गत 14 जून को प्रेस इन्क्लेव कालोनी में मोटरसाइकिल सवार तीन आतंकियों ने शुजात बुखारी के वाहन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं थीं। इसमें शुजात और उनके दो पीएसओ भी मारे गए थे। आतंकी एक पीएसओ का हथियार भी साथ लेते गए थे। घटना के बाद पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। साथ ही सीसीटीवी फुटेज जारी कर हत्यारों की पहचान में लोगों से सहयोग की अपील की थी। फुटेज में एक मोटरसाइकिल पर तीन सवार दिख रहे थे जिनके चेहरे हेलमेट तथा मास्क से ढंके हुए थे। बीच में जो बैठा हुआ था वह माना जा रहा है कि पीएसओ का हथियार लेकर बैठा था। घटना के अगले दिन वायरल एक वीडियो के आधार पर पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ किया था। उसने घटना वाले दिन जो कपड़े पहने थे उसे भी बरामद किया था।
पाकिस्तानी ब्लागर चिह्नित
पुलिस ने एक पाकिस्तानी ब्लागर को भी चिह्नित किया है। यह ब्लागर मूल रूप से श्रीनगर का रहने वाला है, लेकिन अब पाकिस्तान में बस गया है। पिछले साल पाकिस्तान से बातचीत के संबंध में दुबई में आयोजित कांफ्रेंस में शामिल होने के बाद से वह शुजात के खिलाफ लगातार ब्लाग पर दुष्प्रचार कर रहा था
भाजपा ने समर्थन ले लिया था वापस
पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के बाद रियासत में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए गठबंधन सरकार में सहयोगी रही भाजपा ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। घटना की गृह मंत्री राजनाथ सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व पत्रकार बिरादरी ने तीखी निंदा की थी।
मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव व डीजीपी को दिया था नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और राज्य पुलिस प्रमुख को ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की हत्या के मामले में गत सोमवार को नोटिस भेजा था।
आयोग ने कहा था कि इस घटना से राज्य में अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। एनएचआरसी ने कहा कि उसने सैमडेन की अपील का स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें उसने एनएचआरसी और राज्य मानवाधिकार आयोग से इस मामले में तेज जांच कराने का निवेदन किया है।