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Jammu News: मशरूम से बनाई पहचान, सीजन में 7 हजार क्विंटल पैदावार ले रहे 400 किसान (फोटो)
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-करीब सात करोड़ का कारोबार कर कमा रहे मोटा मुनाफा, कृषि विभाग शेड पर दे रहा सब्सिडी
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। गेहूं-धान की खेती के साथ-साथ जिले के 400 किसान मशरूम की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कृषि अधिकारी सांबा के अनुसार तीन से चार महीने के एक सीजन में ही किसान 7 हजार क्विंटल मशरूम पैदा कर करीब सात करोड़ का कारोबार कर रहे हैं। इसमें कृषि विभाग भी उनका पूरा सहयोग कर रहा है। किसानों को शेड के लिए सब्सिडी दी जा रही है।
मशरूम की खेती कर रहे किसान कुलविंद्र सिंह, पंकज, पुरुषोत्तम लाल ने कहा कि पहले वे धान और गेहूं की खेती पर ही निर्भर थे। विभाग की ओर से उन्हें शेड के लिए मदद की गई। अब दो वर्ष से मशरूम की खेती कर रहे हैं। इससे अच्छा लाभ मिल रहा है। उनके अनुसार मंडी में अच्छा दाम मिल जाता है। कंपोज पर भी सब्सिडी मिल रही है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती में मेहनत जरूर है, लेकिन अच्छी आमदनी हो रही है। नकदी फसल है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पहले मशरूम की खेती नहीं होती थी, लेकिन अब किसान जागरूक हो रहे हैं। वे नकदी फसलों को तरजीह दोने लगे हैं।
जोन कृषि अधिकारी राजपुरा विजय चौधरी का कहना है कि जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें मशरूम की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका असर भी दिख रहा है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर 30 किसानों को कंपोज के एक हजार बैग सब्सिडी पर मुहैया करवाए हैं।
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कोट-
जिले में 400 किसान मशरूम की खेती से जुड़े हुए हैं। वे एक सीजन में 7 हजार क्विंटल मशरूम पैदा कर सात करोड़ का कारोबार कर रहे हैं। विभाग की ओर से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभाग जागरूक करने के साथ ही जमीनी स्तर पर भी काम कर रहा है।
संजय वर्मा, मुख्य अधिकारी कृषि विभाग, सांबा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। गेहूं-धान की खेती के साथ-साथ जिले के 400 किसान मशरूम की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कृषि अधिकारी सांबा के अनुसार तीन से चार महीने के एक सीजन में ही किसान 7 हजार क्विंटल मशरूम पैदा कर करीब सात करोड़ का कारोबार कर रहे हैं। इसमें कृषि विभाग भी उनका पूरा सहयोग कर रहा है। किसानों को शेड के लिए सब्सिडी दी जा रही है।
मशरूम की खेती कर रहे किसान कुलविंद्र सिंह, पंकज, पुरुषोत्तम लाल ने कहा कि पहले वे धान और गेहूं की खेती पर ही निर्भर थे। विभाग की ओर से उन्हें शेड के लिए मदद की गई। अब दो वर्ष से मशरूम की खेती कर रहे हैं। इससे अच्छा लाभ मिल रहा है। उनके अनुसार मंडी में अच्छा दाम मिल जाता है। कंपोज पर भी सब्सिडी मिल रही है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती में मेहनत जरूर है, लेकिन अच्छी आमदनी हो रही है। नकदी फसल है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पहले मशरूम की खेती नहीं होती थी, लेकिन अब किसान जागरूक हो रहे हैं। वे नकदी फसलों को तरजीह दोने लगे हैं।
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जोन कृषि अधिकारी राजपुरा विजय चौधरी का कहना है कि जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें मशरूम की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका असर भी दिख रहा है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर 30 किसानों को कंपोज के एक हजार बैग सब्सिडी पर मुहैया करवाए हैं।
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कोट-
जिले में 400 किसान मशरूम की खेती से जुड़े हुए हैं। वे एक सीजन में 7 हजार क्विंटल मशरूम पैदा कर सात करोड़ का कारोबार कर रहे हैं। विभाग की ओर से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभाग जागरूक करने के साथ ही जमीनी स्तर पर भी काम कर रहा है।
संजय वर्मा, मुख्य अधिकारी कृषि विभाग, सांबा।