जम्मू कश्मीर में विकलांगता अधिनियम का मसौदा तैयार
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जम्मू कश्मीर में दिव्यांग स्वयं सहायता समूह की स्थापना करें, ताकि वे सरकार की विभिन्न आर्थिक और विकास संबंधी गतिविधियों में शामिल हो सकें। यह बात मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों तथा दिव्यांगों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने इन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं, विशेष रूप से मनरेगा के तहत शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को भी कवर करने का सुझाव दिया। सीएम ने कहा कि राज्य के विकलांगता अधिनियम का मसौदा लगभग तैयार है, जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
समाज कल्याण मंत्री सज्जाद गनी लोन और समाज कल्याण राज्य मंत्री आसिया नकाश भी बैठक में उपस्थित रहीं। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि समय आ गया है कि अब दिव्यांगों के प्रति सामाजिक रवैया बदलने और चुनौतियों के आधार पर उनके लिए समान अवसर मिलें। वे हर स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इनके प्रति नकारात्मक सोच बदलने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।
दिव्यांगों को मिलेगी कई विशेष सुविधा
मुख्यमंत्री ने दिव्यांगों के लिए कमरे और विशेष काउंटर को रैंप की सुविधा और कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, बैंकों, अस्पतालों और प्रमुख इमारतों पर ऐसी सुविधा देने का प्रावधान करने को कहा, ताकि इन्हें कोई दिक्कत न हो।
मुख्यमंत्री ने महिला विकास निगम और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग निगम को शारीरिक रूप से दिव्यांगों के लिए किसी भी परेशानी और समस्या के बिना ऋण सुविधाओं के मामलों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया। बैठक में राज्य में शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए मोटर चालित स्कूटी जारी करने का फैसला किया है।
बैठक में बताया गया कि आज तक महिला विकास निगम द्वारा 471 शारीरिक रूप से विकलांग महिलाओं के बीच 8.5 करोड़ रुपये और जम्मू-कश्मीर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग विकास निगम द्वारा 500 शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के बीच 6.00 करोड़ 8.5 करोड़ रूपये ऋण के रूप में वितरित किए गए।