विस के अंतिम सत्र में भावुक हुए उमर, पढ़ें भाषण
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मौजूदा विधानसभा के आखिरी सत्र के दौरान सियासी दलों को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पाठ पढ़ाया तो कभी भावुक हो उठे। उमर ने अवाम से विधानसभा चुनाव में जरूर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का आह्वान भी किया।
उन्होंने अवाम को ऐसी सियासी ताकतों से भी खबरदार किया जो मतदान के बहिष्कार की आशंका के मद्देनजर गुणाभाग कर प्रत्याशियों का चयन कर रहे हैं। उमर ने माना कि रियासत में भ्रष्टाचार सबसे बड़ी बीमारी है।
इस पर अंकुश लगाने के प्रयास किए। वगैर भेदभाव के विभिन्न इलाकों में तरक्की का जाल बिछाया गया। उनके कार्यकाल के दौरान अब तक अस्सी फीसदी आतंकी घटनाओं में कमी आई।
लोकतंत्र को हार-जीत से ना तौला जाए
विधानसभा में अपने 45 मिनट के संबोधन के दौरान उमर ने रियासत में जोरदार तरीके से लोकतंत्र को मजबूत बनाने की वकालत करते हुए अपने पौने छह साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के अनुभवों, उपलब्धियों और खामियों को भी साझा किया।
उमर ने कहा कि सरकार का नेतृत्व और रियासत की खिदमत करने का मौका देने के लिए वह अवाम के सबसे अधिक शुक्रगुजार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव और लोकतंत्र का संस्थान मजबूत होना चाहिए।
इन संस्थानों की मजबूती को हार-जीत में न तौला जाए। चुनाव की निष्पक्षता उठाकर इस संस्थान को कमजोर न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि क्या 2004 से पहले और इसके बाद राज्य में हुए चुनावों में धांधली हुई। बिल्कुल नहीं।
सियासी दल एक दूसरे का विरोध जरूर करें, लेकिन जाति दुश्मनी पैदा न करे। इससे लोकतंत्र को नुकसान होता है।
रियासत में 2008 में शुरू हुई यह बीमारी
उमर ने कहा कि आज वह संतुष्ट है कि पिछली विधानसभा के आखिरी और मौजूदा विधानसभा के आखिरी सत्र में फर्क है। वह जानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को आखिरी सत्र में किन हालात में सदन को संबोधित करना पड़ा था।
लिहाजा वह स्पीकर, डिप्टी स्पीकर के अलावा सदन के हर सदस्य के आभारी हैं। उमर ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अवाम को खबरदार रहना होगा। क्योंकि मतदान के बहिष्कार पर कुछ सियासी दलों की नजर हैं।
माहौल बिगाड़ने की भी कोशिशें होंगी। उमर ने कहा कि चुनाव और सियासी असूलों की बुनियाद पर होनी चाहिए। चुनाव के लिए अवाम के बीच दरारें पैदा की जाती हैं। 2008 के हालात का खामियाजा आज भी हम भुगत रहे हैं। पत्थरबाजी की बीमारी भी 2008 में शुरू हुई इसे भी हमने भुगता।
मेरे बाल सफेद करने में महबूबा का किरदार
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनके बाल सफेद करने में सदन में नेता विपक्षी रहीं और मौजूदा सांसद महबूबा मुफ्ती का किरदार रहा। उन्होंने हमें सदन में आराम से बैठने नहीं दिया। उमर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर अवाम ने फिर मौका दिया तो हिसाब चुकता करूंगा। हालांकि इससे पूर्व गेस्ट गैलरी में सांसद महबूबा मुफ्ती भी मौजूद थीं।
आइना देखकर पता लगता है समय कैसे गुजरा
अपने पौने छह साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के हवाले से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इसका पता ही नहीं चला। सिर्फ जब आइने में अपनी तस्वीर देखता तो एक मिनट में इसका अहसास होता है। जब राज्य विधानसभा में दाखिल हुआ तो जवान था, अब लगता है कि बुढ़ापे की तरफ कदम बढ़ रहे। बाल सफेद हो गए और पढ़ने के लिए चश्मा जरूरी। आइने में कोई भी काला बाल नजर नहीं आता।
अवाम लिखता है हमारा एसीआर
चुनाव में हार-जीत पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमारा रिपोर्ट कार्ड, वार्षिक गुप्त रिपोर्ट अथवा एसीआर जनता लिखती है।
हम खुद नहीं लिख सकते। लोगों का फैसला हमें अच्छा लगे या बुरा, उसका सम्मान करना चाहिए। क्योंकि अवाम के पास वोट ही सत्ता पक्ष अथवा विपक्ष के इम्तिहान की कुंजी है।