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हार्वर्ड विश्वविद्यालय में बोले उमर 'भारत-पाक में शांति प्रक्रिया के लिए कश्मीरी जरूरी'

Wed, 15 Feb 2017 12:38 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 15 Feb 2017 12:38 AM IST
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omar abdullah speaks in harvard university
omar abdullah - फोटो : Social Media

नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए कश्मीरी विश्वसनीय शांति प्रक्रिया शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे ही कश्मीर मसले का हल निकल सकता है। दोनों को एक-दूसरे को कूटनीतिक स्तर पर परास्त और विजय का दावा करने से बचना चाहिए।

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हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कश्मीर मुद्दे पर आयोजित कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान की ओर से समन्वित तथा स्थायी शांति प्रक्रिया शुरू करने में विफल रहने के कारण कश्मीरियों को काफी कुछ सहना पड़ा है। स्थायी शांति प्रक्रिया के लिए बाहरी तथा आंतरिक दोनों मोर्चों पर बातचीत शुरू करनी होगी।
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इस राजनीतिक मुद्दे के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों में राजनीतिक इच्छाशक्ति का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यापार, विकास तथा प्रशासनिक सुधार कश्मीर मुद्दे के राजनीतिक समाधान का स्थान नहीं ले सकता है। उन्होंने कहा कि कश्मीर के राजनीतिक भावनाओं के प्रबंधन ने लंबे व खतरनाक राजनीतिक शून्यता और अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है। दुर्भाग्य से बातचीत की संस्थाओं को बदनाम किया गया। इन संस्थाओं को बहाल करने और बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने के लिए विश्वास बहाली पहली चुनौती है। 

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'कूटनीतिक रिश्ते को अस्पष्टता के साथ परिभाषित किया जाता है'

omar abdullah speaks in harvard university
उमर अब्दुल्ला - फोटो : FILE PHOTO

उमर ने कहा कि दिल्ली तथा इस्लामाबाद के बीच कश्मीर तथा अन्य मुद्दों पर कूटनीतिक रिश्ते को अस्पष्टता के साथ परिभाषित किया जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्व में कश्मीर के मुद्दे पर शुरू हुई बातचीत से उम्मीद जगी थी, लेकिन बाद में यह सारे प्रयास पटरी से उतर गए। जरूरत इस बात की है कि कश्मीर को लेकर चल रहे लंबे संघर्ष से जान माल को हो रहे नुकसान को ध्यान में रखकर नए रास्ते की तलाश की जाए।

घरेलू चुनौतियों, राजनीति दोनों से ऊपर उठकर दिल्ली और इस्लामाबाद को कश्मीर के मसले पर सकारात्मक तथा परिणामदायक बातचीत की ओर बढ़ना चाहिए। कश्मीर मसले को सेना तथा प्रशासनिक आधार या कूटनीतिक आधार पर हल करने के परिणाम सामने हैं। आज जरूरत इस बात की है कि कश्मीर की राजनीतिक भावनाओं से जुड़कर पूरे विश्व में इस प्रकार के संघर्ष के राजनीतिक समाधान का अनुकरण करें। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और राजनीतिक भावनाओं का सम्मान कर भविष्य में शांति के द्वार खोले जा सकते हैं। 

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