अब स्मार्ट कार्ड से मिलेगा सरकारी राशन
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राशन की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने राशन कार्ड के स्थान पर स्मार्ट कार्ड बनाने की योजना बनाई है। एटीएम कार्ड की तर्ज पर कंप्यूटराइज्ड मशीन से उपभोक्ता खुद अपने राशन की स्लिप निकालेगा और डिपो पर उसे दिखाकर राशन लेगा।
सीएपीडी मंत्री चौधरी जुल्फिकार ने विधानसभा में ‘कट मोशन’ के दौरान सदन को बताया कि इस क्रम में सरकार विभाग के रिकार्ड का आधुनिकीकरण कर रही है। 74 करोड़ की लागत वाली इस योजना में रियासत और राज्य का 50-50 फीसदी हिस्सा होगा। टीपीडीएस योजना के तहत तमाम राशन कार्ड धारकों का डाटा कंप्यूटरों में सुरक्षित किया जाएगा।
योजना के तहत 22.73 लाख परिवारों को स्मार्ट कार्ड मिलेंगे। इस प्रणाली से अवगत होने के लिए विभाग के निदेशक के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम छत्तीसगढ़ जाएगी, जहां इसके तहत काम हो रहा है।
2011 जनगणना के अनुसार राशन देने का प्रयास
मंत्री ने कहा कि राशन की चोरी रोकने के लिए राशन ढोने वाले वाहनों पर जीपीआरएस ट्रैकर्स लगेंगे, ताकि गोदामों से निकलने वाले राशन के वाहनों पर नजर रखी जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार रियासत में नेशनल फूड सेफ्टी एक्ट-2013 लागू करने का प्रयास कर रही है। केंद्र की यूपीए सरकार के कार्यकाल में आई योजना रियासत में लागू नहीं हो सकी है।
विभाग के अधिकारी योजना का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। केंद्र सरकार की मदद मिली तो इसे रियासत में लागू करेंगे। इससे 74 लाख लोगों को दो रुपये किलो आटा और तीन रुपये किलो चावल मुहैया करवाए जा सकेंगे। नई सरकार 2011 की जनगणना के अनुसार रियासत के लोगों को राशन मुहैया करवाने की कवायद में जुटी है।
सीएपीडी मंत्री ने कहा कि वर्तमान में 2002 की जनगणना के अनुसार राशन वितरित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष मुद्दा उठाया है। केंद्र से पर्याप्त राशन मिलते ही ज्यादा से ज्यादा लोगों को सरकारी राशन मिल पाएगा।