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हिंसा रोकने में अब बेअसर हो रही नोटबंदी, आतंकियों को फिर हवाला से फंडिग शुरू

Fri, 17 Feb 2017 02:28 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 17 Feb 2017 02:28 PM IST
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noteban becoming fail to stop voilence
हिंसा और उपद्रव का दौर का शुरू करने की साजिश - फोटो : FILE PHOTO

कश्मीर में फिर से हिंसा और उपद्रव का दौर का शुरू करने की साजिशें तेज हो गईं हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में मार्च से हिंसा भड़कने की आशंका जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अलगाववादियों और आतंकी संगठनों के गठजोड़ ने मार्च से फिर से व्यापक विरोध प्रदर्शन और हमले की साजिश बुनी है। हवाला के जरिए फंडिंग तेज हो रही है।

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पत्थरबाजों को दिहाड़ी भी मिलने लगी है। केंद्र सरकार ने पत्थरबाजी की घटनाएं बंद होने के पीछे नोटबंदी के असर को कारण बताया था। एजेंसियों के अनुसार अब यह असर समाप्त हो रहा है। दूसरी ओर, केंद्र की रिपोर्ट के उलट रियासत सरकार मानती है कि कश्मीर हिंसा पर नोटबंदी का कोई असर नहीं पड़ा था।
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इस संबंध में विधानसभा में स्पष्ट कर चुकीं हैं कि नोटबंदी के कारण पत्थरबाजी की घटनाएं बंद होने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा था कि ऐसी कोई रिपोर्ट रियासत सरकार को नहीं मिली है जिसमें नोटबंदी का कश्मीर हिंसा पर किसी तरह के असर की बात कही गई हो। 

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मुठभेड़ के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन

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kashmir - फोटो : PTI
महबूबा ने उपद्रव और हिंसा में जाली मुद्रा के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार किया है। नोटबंदी के बाद हवाला कारोबार में 60 प्रतिशत और आतंकी घटनाओं में 50 प्रतिशत की गिरावट की बात कही गई थी। अब जनवरी से पत्थरबाजी की घटनाएं फिर से शुरू हुईं हैं। मुठभेड़ के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। दो माह में पत्थरबाजी की दर्जन भर से अधिक घटनाएं हुईं हैं।

एनआईए ने आतंकियों और अलगाववादियों को फंडिग की जांच के मामले में आतंकी वित्त पोषण प्रकोष्ठ नामक अलग सेल बनाया है। यह सेल अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी समेत अन्य अलगाववादियों को फंडिंग की जांच कर रहा है।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में 15 वर्षों में हवाला के जरिये फंडिग के मामले में 173 मामले दर्ज हुए थे। इनमें से 90 मामलों को चुनौती दी गई और 45 मामले अभी जांच में हैं। 9 मामलों में पहचान नहीं होने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पाई और छह मामले स्वीकृत नहीं हुए। ऐसे 23 मामलों में अभियोजन की प्रतीक्षा है। 
 
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