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जम्मू में उत्तर भारत के पहले स्पेस साइंस सेंटर की रखी गई नींव, जितेंद्र सिंह ने मोदी को दिया क्रेडिट

Fri, 12 Oct 2018 04:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 12 Oct 2018 04:27 PM IST
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north india first space science center established in central university jammu
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जम्मू में उत्तर भारत के पहले स्पेस साइंस सेंटर की नींव रख दी गई। सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जम्मू में बतौर मुख्य अतिथि इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) के चेयरमैन के शिवन और पीएमओ में राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने सतीश धवन सेंटर फार स्पेस साइंस का शिलान्यास किया। इस दौरान इसरो केपहले चेयरमैन डा. विक्रम साराभाई के कृतित्व को भी याद किया गया, जिनका जन्म शती समारोह इस साल मनाया जा रहा है। डा. जितेंद्र सिंह ने सेंटर की स्थापना का क्रेडिट प्रधानमंत्री मोदी और उनकी वैज्ञानिक सोच को दिया।
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डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार एकेडमिक और रिसर्च प्रोग्रामों को दूरस्थ इलाकों तक ले जाने में कामयाब रही है। उन्होंने कहा कि पहले स्पेस रिसर्च और एकेडमिक्स केवल दक्षिण भारत राज्यों तक सीमित था, लेकिन बीते चार साल से देश के अन्य राज्यों में भी यह फैला है। मार्स मिशन को उन्होंने स्वदेशी तकनीकी का शानदार मिशन करार दिया। इसे लांच कराने वाले डा. के राधाकृष्णन की भी सराहना की, जिन्हें सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जम्मू में स्पेस टेक्नोलाजी टीचिंग डिपार्टमेंट के सलाहकार का जिम्मा दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह स्पेस साइंस सेंटर रियासत के इतिहास में मील का पत्थर माना जाएगा। इस दौरान सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ जम्मू और इसरो के साथ ही सेंट्रल स्पेस इंस्टूमेंट्स आर्गेनाइजेशन (सीएसआईआर-सीएसआईओ) का भी एमओयू हुआ। मौके पर इसरो केपूर्व चेयरमैन डा. केराधाकृष्णन, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जम्मू केवीसी प्रो. अशोक एमा आदि मौजूद रहे।
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1150 वर्ग मीटर में बनेगा स्पेस सेंटर

सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जम्मू में जम्मू-कश्मीर का अपनी तरह का पहला स्पेस साइंस सेंटर 1150 वर्ग मीटर में बनेगा। इसमें जियो स्पेशियल डाटा एनालिसिस की सुविधा होगी। इसके जरिये प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग और लैंड यूज पैटर्न की प्लानिंग होगी। जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के साथ ही जमीनी आकलन संभव होगा। सेंटर में एक एस्ट्रोफिजिक्स रिसर्च लैब, ग्लेशियर स्टडीज लैब भी होगी। नए सेंसर और मैटीरियल डेवलप करने के लिए स्पेस एप्लिकेशन मैटीरियल साइंस लैब भी होगी।

डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर भी होगा स्थापित
स्पेस सेंटर के अलावा यहां एक डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, ताकि क्षेत्र में सूखे, बाढ़, वनाग्नि, भू-स्खलन, जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में रिसर्च करना संभव हो। इनका असर कम से कम करने के उपाय तलाशे जा सकें।
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