स्वाइन फ्लू: जम्मू में ना सुविधाएं और ना दवाएं
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स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के खून और थूक के सैंपलों की जांच के लिए संभाग के दस जिलों पर टेस्टिंग की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन सैंपलों को जांच के लिए दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ कम्युनिकेवल डिसीज लेबोरेटरी पर निर्भर होना पड़ रहा है।
संभाग स्तर पर आइसोलेट की सिर्फ जीएमसी के चोपड़ा नर्सिगिं होम में सुविधा है। हालांकि, स्वाइन फ्लू के बढ़ते दायरे को देखते हुए जिला और ब्लाक स्तर पर आइसोलेट बेड स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
रियासत के तीनों संभागों में स्वाइन फ्लू बढ़ने की आशंका और बढ़ गई है। कश्मीर में स्वाइन फ्लू से कई लोगों की अनाधिकारिक तौर पर मौत भी हो चुकी है। कई मरीजों को वेंटिलेटर पर इलाज देना पड़ रहा है, लेकिन स्वाइन फ्लू के लगातार बढ़ रहे संदिग्ध मामलों के बावजूद जम्मू संभाग में सैंपलों के टेस्टिंग की कोई सुविधा शुरू नहीं की जा सकी है।
दिसंबर, 2009 से स्वाइन फ्लू दस्तक देता आ रहा है। उस समय जम्मू के बिश्नाह क्षेत्र के खैरी सरोर गांव के एक निवासी की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई थी। उस समय जम्मू संभाग में 60 से ज्यादा लोग स्वाइन प्लू से पाजिटिव पाए गए थे, जिन्हें तत्काल इलाज दिया गया। इसके कई सालों बाद भी स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए इंतजाम औपचारिकताओं तक ही सीमित हैं।
तीन से सात दिन में आ पाती है मरीज की जांच रिपोर्ट
दिल्ली भेजे जा रहे सैंपलों की रिपोर्ट 3 से 7 दिन के भीतर आ रही हैं। ऐसे में संदिग्ध मरीजों को कौन सा इलाज दिया जाए, ये रिपोर्ट पर निर्भर रहता है। इससे मरीज को उचित इलाज मिलने में देरी होती है।
कश्मीर की बात करें तो वहां दस जिलों पर स्किमस में सैंपलों की टेस्टिंग की सुविधा दी गई है, लेकिन जम्मू संभाग में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है।
लेकिन जिला स्तर पर ऐसे मरीजों को उचित इलाज देने के लिए प्रबंध नाकाफी हैं। नए दिशा निर्देशों में जिला अस्पतालों में चार और ब्लाक स्तर पर सीएचसी में दो आइसोलेट बेड स्थापित करने को कहा गया है।