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ग्राउंड रिपोर्टः डोडा से अब आतंकी नहीं, प्रशासनिक अधिकारी बनकर निकल रही नई पौध
Sat, 31 Oct 2020 05:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आकाशदीप, डोडा
आकाशदीप, डोडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 31 Oct 2020 05:04 AM IST
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गाजी अब्दुल्ला का सम्मान करती सेना...
- फोटो : amar ujala
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करीब दो दशक तक आतंक के गढ़ रहे डोडा जिला में तस्वीर अब बदल रही है। कश्मीर से लगते जम्मू संभाग के इस जिला से अब युवा आतंकी नहीं, अफसर बन रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद युवाओं की सोच में यहां बदलाव दिख रहा है। पाकिस्तान में बैठे आतंक के सरपरस्त अब उन्हें बरगला नहीं पा रहे हैं। आतंकवाद को दरकिनार कर युवा करियर पर फोकस करने लगे हैं।
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आतंकवाद से जुड़े रहे लोगों के घरों के बच्चे भी अब प्रशासनिक अधिकारी बन रहे हैं। अनाथालय में रहे पूर्व आतंकी के बेटे गाजी अब्दुल्ला ने इसी साल केएएस परीक्षा पास कर एक नजीर पेश की है। विपरीत परिस्थितियों में मेहनत के बूते खुद अपनी तकदीर लिखने वाले गाजी को सेना युवाओं के सामने एक प्रेरक के रूप प्रस्तुत कर रही है।
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31 अक्तूबर, 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद यहां विकास ने भी रफ्तार पकड़ी है। इसी सत्र से डोडा में मेडिकल कॉलेज शुरू हो रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने हाल ही में यहां एमबीबीएस की 100 सीटों के पहले बैच को बैठाने की मंजूरी दी है। पीएमजीएसवाई के तहत सड़कों को पक्का करने के मामले में डोडा जिला इस साल पहले स्थान पर रहा है। जिले के मरमत निवासी सुरेश शर्मा का कहना है कि कभी आतंकवाद से जुड़े रहे परिवारों के बच्चे भी अधिकारी बन रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रशासन ने भी इस दिशा में प्रयास तेज किए हैं। डोडा के सामाजिक कार्यकर्ता इकवाल वानी कहते हैं कि युवा अब किसी के बहकावे में नहीं आने वाले। जिले में विकास कार्य शुरू होने और आतंकवाद से नकेल कसने से राहत महसूस कर रहे हैं। डोडा के ही ओंकार सिंह राणा के अनुसार 1999 से 2010 तक बहुत लोगों का बहुत खून बहा है। कुल्हाद और चाप नाड़ी कांड में आतंकवादियों ने बर्बरता की सारी हदें तोड़ लोगों को मारा है। दहशत के सैकड़ों लोग पलायन को मजबूर हो गए थे। अब एक उम्मीद जगी है।
कुल्हंड निवासी कश्मीर सिंह कहते हैं कि उन्होंने आतंकवाद का बहुत बुरा दौर देखा है। कई अपनों को इस आग में खोया है। लगता था कि आज नहीं तो कल हम भी मारे जाएंगे। अब आतंकियों की कमर टूट गई है। 2010 में डोडा को आतंकवाद मुक्त जिला घोषित कर दिया गया था, लेकिन उसके बाद पाकिस्तान की साजिश के चलते गुमराह हुए कुछ युवाओं ने फिर आतंकवाद का दामन थाम कर चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन अब लोग खासकर युवा वर्ग समझ चुका है।