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NIT विवाद पर बोले डिप्टी सीएम, नहीं मानी जाएगी छात्रों की कोई भी नाजायज मांग

Sun, 10 Apr 2016 06:11 AM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Sun, 10 Apr 2016 06:11 AM IST
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nit students met with Deputy CM
न‌िर्मल स‌िंह - फोटो : Amar Ujala
श्रीनगर के एनआईटी को शिफ्ट करने की मांग पर अड़े छात्रों को लेकर शनिवार को राज्य के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी कोई भी नाजायज मांग को पूरा नहीं किया जाएगा। बाकी की मांगों को मानने के लिए हमने सहमति जताई है। साथ ही उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस की आलोचना करना सही नहीं है।
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डा. निर्मल सिंह ने बताया कि हमारी छात्रों से शुक्रवार करीब 6 घंटे तक बातचीत चली जिसमें हमने उन्हे कहा कि उनकी जायज़ मांगों को माना जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने स्पष्ट रूप से उन्हें यह भी कहा कि एनआईटी को शिफ्ट करने की मांग उठाना ही जायज नहीं, इसे सुन्ना तो दूर की बात है।
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एनआईटी श्रीनगर किसी भी हाल में शिफ्ट नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एमएचआरडी ने छात्रों के माइग्रेशन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला। सोशल मीडिया पर जम्मू कश्मीर पुलिस की आलोचना और उन्हें देशद्रोही ठहराए जाने पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज जो हुआ यह दुर्भाग्यपूर्ण था, इसमें बच्चे घायल हुए, ऐसा नहीं होना चाहिए था। इसके कारण पूरे पुलिस बल के खिलाफ ऐसा कहना यह गलत है। 
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जम्मू-कश्मीर पुल‌िस की आलोचना सही नहीं

nit students met with Deputy CM
एनआईटी श्रीनगर - फोटो : Amar Ujala
डा. निर्मल सिंह ने कहा 3000 ऐसे शहीद हैं जम्मू कश्मीर पुलिस के, जिन्हें इसी तिरंगे में लपेटा गया है। साथी ही उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस कैसे आतंकवाद के खिलाफ राज्य में लड़ रही है, यह बात भी स्पष्ट है। ऐसे में एक छोटी सी घटना के पीछे पूरे पुलिस बल को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं।

हमें यह भी देखना चाहिए वह राष्ट्र के लिए क्या कुछ नहीं कर रहे। मजिस्ट्रेट जांच हो रही है दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तो होगी। वहीं सरकार के किसी भी प्रतिनिधि के एनआईटी न पहुंचने पर छात्रों की नाराजगी को लेकर उन्होंने कहा कि कश्मीर की संवेदनाओं को समझने की आवश्यकता है।

हम इसलिए वहां नहीं गए क्योंकि हम न ही राजनीति करना चाहते थे और न ही राजनीतिक रंग देना चाहते थे। अगर हम चले जाते तो सबका तांता लग जाता और इस मुद्दे पर राजनीतिक रंग लग जाता।

कश्मीरी छात्रों पर देश के अन्य कई हिस्सों में हुए हमलों पर उन्होंने कहा ऐसा नहीं होना चाहिए। कुछ अफवाएं भी हैं लेकिन कुछ अगर हुआ है तो राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को देखना चाहिए जोकि पहले से ऐसी चीजों को लेकर सतर्क हैं।    
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