लुप्त हो गए अलफा, टैंगो, चार्ली के संदेश
कारण, दरबार के दौरान जम्मू की सड़कों पर भारी संख्या में वीआईपी मूवमेंट होती है। कभी किसी ओर से मुख्यमंत्री आ रहे हैं तो कभी किसी सड़क से मंत्री और अफसरशाह गुजर रहे हैं, लेकिन इस बार रियासत में सरकार न बनने से ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को अभी तक राहत मिली हुई है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों की फौज न होने से सड़कों पर भी ट्रैफिक कर्मियों की हमेशा की तरह फौज नहीं खड़ी रहती।
बिना लोकतांत्रिक सरकार के चल रहे दरबार का सबसे ज्यादा आम लोगों को लाभ हो रहा है। सुदर्शन शर्मा कहते हैं कि पहले दरबार आता था तो किसी भी सड़क पर अचानक नाका लगाकर यातायात रोक दिया जाता था।
बताया जाता था कि फ्लां मंत्री या मुख्यमंत्री का काफिला गुजरने वाला है। खासकर सचिवालय से लेकर रेजीडेंसी रोड स्थित मुख्यमंत्री निवास तक कभी भी ट्रैफिक में घंटों रुकना पड़ता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। पिछले दो माह से दरबार यहां है, लेकिन कभी भी ट्रैफिक में रुकना नहीं पड़ा है।
ज्यादातर होटलों के कमरे खाली
भले ही दो माह से सचिवालय जम्मू में है, लेकिन शहर के ज्यादातर होटलों में मात्र 30-40 फीसदी ही कमरे भरे हैं। इसका मुख्य कारण सरकार का न बनना है। जम्मू होटल एंड लाज एसोसिएशन के प्रेसीडेंट इंद्रजीत खजूरिया कहते हैं कि यह सीजन मुख्य रूप से दरबार पर निर्भर रहता है।
सामान्य दिनों में जब सरकार रहती है तो बड़ी संख्या में कश्मीर से लोग काम करने के लिए जम्मू पहुंचते हैं। इस सीजन में होटलोें के 60-70 फीसदी कमरे भरे रहते हैं, लेकिन इस बार भारी नुकसान हो रहा है। खजूरिया के अनुसार इस समय बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी आ जाती है।
वैष्णो देवी में रोजाना बमुश्किल दस हजार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसका असर भी इन दिनों रहता है। होटलों के संचालक चाहते हैं कि जल्द से जल्द सरकार बने ताकि उनका कारोबार फिर से फले फूले।