नई सरकार पेश करेगी लेखा अनुदान
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रियासत की नई सरकार को अगले वित्तीय वर्ष की प्रथम छमाही के लिए लेखा अनुदान पेश करना पड़ेगा। अगर सरकार मार्च के पहले सप्ताह गठित हो जाती है तब भी पूर्ण बजट पेश किए जाने की संभावना कम है। पूर्ण बजट के लिए तैयारी में कम से कम दो माह लग जाते हैं।
फरवरी में बजट पेश करने के लिए दिसम्बर-जनवरी से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बजट किसी भी हालत में 31 मार्च से पहले पारित कराने की संवैधानिक मजबूरी है। लिहाजा, नई सरकार गठित होने के बाद भी रियासत को प्रथम छमाही में लेखा अनुदान से ही काम चलाना पड़ेगा।
अगर सरकार गठन में देर होती है तो राज्यपाल लेखा अनुदान पारित करेंगे। राज्यपाल शासन में विधायिका की शक्तियां गवर्नर में निहित हैं। सरकार गठन छह माह से अधिक टलता है तो पूर्ण बजट संसद में पारित कराना पडे़गा। वार्षिक योजना का प्रारूप लगभग तैयार कर लिया गया है।
इसे मंजूरी के लिए केंद्रीय नीति आयोग के पास भेजा जा सकता है। वित्त विभाग के सूत्रों ने बताया कि लेखा अनुदान के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। नई सरकार का गठन मार्च के पहले सप्ताह तक संभावित है।
अगर सरकार गठन में देर होगी तो गवर्नर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर लेखा अनुदान को मंजूरी देंगे ताकि रियासत के जरूरी खर्चों के लिए राशि के प्रबंध में दिक्कतें पेश नहीं आएं। जम्मू कश्मीर पहले से गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है।
केंद्र के पास रियासत का 5000 करोड़ बकाया
केंद्र सरकार के पास रियासत के लगभग 5000 हजार करोड़ रुपये बकाया है। राज्यपाल एन एन वोहरा ने इस बकाया राशि के लिए वित्त विभाग को केंद्रीय नीति आयोग के पास फिर से मांग पत्र सौंपने को कहा है। केंद्र सरकार ने विभिन्न मदों में 411 करोड़ रुपये मंजूर कर रियासत को थोड़ी राहत दी है।
यह राशि केंद्रीय करों के हिस्से, विशेष योजना सहायता और सड़कों-पुलों के लिए दी गई है। रियासत ने केंद्र सरकार से एक हजार करोड़ के बाजार ऋण के लिए मंजूरी मांगी है। इससे पहले रियासत सरकार इस वित्तीय वर्ष में डेढ़ हजार करोड़ का बाजार ऋण ले चुकी है।
योजना एवं विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी बी आर शर्मा ने कहा है कि मार्च के बाद आने वाले खर्चों के लिए लेखा अनुदान मजबूरी बन गई है। गवर्नर इसे मंजूरी दे सकते हैं। यह चार-छह माह के खर्चों के लिए होगा। बाद में पूर्ण बजट पारित किया जा सकता है।