{"_id":"5748981e4f1c1b4407691621","slug":"neither-the-direction-nor-the-vision-of-current-government","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मौजूदा हुकूमत की न तो दिशा है न विजन : उमर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौजूदा हुकूमत की न तो दिशा है न विजन : उमर
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 28 May 2016 12:25 AM IST
विज्ञापन
विधानसभा में बोलते उमर अब्दुल्ला
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में बोलते हुए गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मौजूदा हुकूमत में न तो दिशा है और न ह विजन। दरअसल मजबूरी में यह सरकार बनी है इस वजह से संकट है। राज्यपाल के अभिभाषण में कुछ नया नहीं है।
उन्होंने कहा कि अभिभाषण में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की बात की गई है, लेकिन यह समझ में नहीं आता कि इससे फायदा है या नुकसान। यदि फायदा है तो मुफ्ती साहब के नाम पर नई स्कीम की जरूरत क्यों पड़ी। लोग सड़को पर उतरे तो फिर राज्यपाल शासन में राशन का स्केल बढ़ाया गया।
नई सरकार बनी तो उसने गलती सुधारने के लिए जनता के खर्चे पर नई स्कीम लांच कर दी। इसमें भी केंद्र से कुछ नहीं मिला। नीट का मामला राज्य के विशेष दर्जे पर सीधा-सीधा हमला है। यह इकलौता राज्य है जहां मेडिकल शिक्षा समवर्ती सूची में न होकर स्टेट सब्जेक्ट है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार इस मामले पर बचाव नहीं कर सकी।
विज्ञापन
शुक्र है कि जयललिता तथा अन्य ने इस मुद्दे पर इतना बवाल मचाया कि केंद्र सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर हमले करते हुए कहा कि आपने इसे कोई मुद्दा नहीं बताया जबकि यह मुद्दा था। पिछले दिनों श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में आपने कहा था कि बाहरी बच्चे हमारे लिए मेहमान हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अभिभाषण में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की बात की गई है, लेकिन यह समझ में नहीं आता कि इससे फायदा है या नुकसान। यदि फायदा है तो मुफ्ती साहब के नाम पर नई स्कीम की जरूरत क्यों पड़ी। लोग सड़को पर उतरे तो फिर राज्यपाल शासन में राशन का स्केल बढ़ाया गया।
विज्ञापन
नई सरकार बनी तो उसने गलती सुधारने के लिए जनता के खर्चे पर नई स्कीम लांच कर दी। इसमें भी केंद्र से कुछ नहीं मिला। नीट का मामला राज्य के विशेष दर्जे पर सीधा-सीधा हमला है। यह इकलौता राज्य है जहां मेडिकल शिक्षा समवर्ती सूची में न होकर स्टेट सब्जेक्ट है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार इस मामले पर बचाव नहीं कर सकी।
विज्ञापन
शुक्र है कि जयललिता तथा अन्य ने इस मुद्दे पर इतना बवाल मचाया कि केंद्र सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर हमले करते हुए कहा कि आपने इसे कोई मुद्दा नहीं बताया जबकि यह मुद्दा था। पिछले दिनों श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में आपने कहा था कि बाहरी बच्चे हमारे लिए मेहमान हैं।
'जम्मू में अल्पसंख्यक अपने कोे सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे'
जम्मू-कश्मीर विधानसभा
- फोटो : Amar Ujala
बेशक वे मेहमान हैं लेकिन आपने अपने राज्य के बच्चों के विषय में कुछ नहीं कहा। जबकि वह ऐसा प्लेटफार्म था कि पूरे देश में राज्य की आवाज सुनी जाती। यहां के भी काफी छात्र दूसरे राज्यों में पढ़ रहे हैं जिन्हें परेशानी और बेइज्जती का सामना करना पड़ रहा है। उनकी सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया जाना चाहिए था।
हंदवाड़ा प्रकरण पर उमर ने कहा कि वहां बेगुनाह मारे गए। मेरे कार्यकाल में इन सब मुद्दों पर मुझे कातिल ठहराया जाता था। इस मामले में पीडि़त लड़की का जीना मुश्किल हो गया है। पुलिस भी बदनाम हुई कि लड़की से जबरन बयान दिलवाया। पुलिस तो एनआईटी के मामले में भी बदनाम हुई। सीआरपीएफ लगाकर यह संदेश दिया गया कि जेके पुलिस पक्षपात करती है।
उमर ने कहा कि सरकार जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों को जोड़कर रखने की बात करती हैं, लेकिन लोगों को डराकर नहीं जोड़ा जा सकता। सरकार के मंत्री मुसलमानों को 47 की याद दिलाते हैं। आज चिनाब वैली, किश्तवाड़ और जम्मू में अल्पसंख्यक अपने कोे सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे हैं। उमर ने कहा कि जम्मू में आईआईटी बना। उन्हें इसके लिए मुबारक।
मुख्यमंत्री दो आईआईटी नहीं ला सकीं कोई बात नहीं, लेकिन कम से कम स्मार्ट सिटी ही श्रीनगर को दिला दें। यदि जम्मू को स्मार्ट सिटी नहीं मिला तो वहां बवाल हो जाएगा।
ऐसे-ऐसे शहर स्मार्ट सिटी में शामिल कर लिए गए हैं जिन्हें नक्शे पर काफी मुश्किल से खोजा जा सकेगा। इसका मतलब है कि स्मार्ट सिटी के लिए ठीक से प्रयास नहीं किए गए।
वक्त बहुत जल्दी निकल जाता है
उमर ने महबूबा को सलाह देते हुए कहा कि धरातल पर काम दिखे इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। छह साल का समय देखते देखते निकल जाता है और पता भी नहीं चलता।
मुझे भी नहीं पता चला था और चुनाव का समय आ गया। आपके समय में तो शायद जल्दी ही चुनाव हो जाए। इसलिए समय जाया न करें। उमर ने कहा कि प्रवक्ता की आड़ में ज्यादा दिनों तक टिका नहीं रहा जा सकता। मुख्यमंत्री को जनता के समक्ष आकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी कि क्या सही है और सरकार का स्टैंड क्या है।
हंदवाड़ा प्रकरण पर उमर ने कहा कि वहां बेगुनाह मारे गए। मेरे कार्यकाल में इन सब मुद्दों पर मुझे कातिल ठहराया जाता था। इस मामले में पीडि़त लड़की का जीना मुश्किल हो गया है। पुलिस भी बदनाम हुई कि लड़की से जबरन बयान दिलवाया। पुलिस तो एनआईटी के मामले में भी बदनाम हुई। सीआरपीएफ लगाकर यह संदेश दिया गया कि जेके पुलिस पक्षपात करती है।
उमर ने कहा कि सरकार जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों को जोड़कर रखने की बात करती हैं, लेकिन लोगों को डराकर नहीं जोड़ा जा सकता। सरकार के मंत्री मुसलमानों को 47 की याद दिलाते हैं। आज चिनाब वैली, किश्तवाड़ और जम्मू में अल्पसंख्यक अपने कोे सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे हैं। उमर ने कहा कि जम्मू में आईआईटी बना। उन्हें इसके लिए मुबारक।
मुख्यमंत्री दो आईआईटी नहीं ला सकीं कोई बात नहीं, लेकिन कम से कम स्मार्ट सिटी ही श्रीनगर को दिला दें। यदि जम्मू को स्मार्ट सिटी नहीं मिला तो वहां बवाल हो जाएगा।
ऐसे-ऐसे शहर स्मार्ट सिटी में शामिल कर लिए गए हैं जिन्हें नक्शे पर काफी मुश्किल से खोजा जा सकेगा। इसका मतलब है कि स्मार्ट सिटी के लिए ठीक से प्रयास नहीं किए गए।
वक्त बहुत जल्दी निकल जाता है
उमर ने महबूबा को सलाह देते हुए कहा कि धरातल पर काम दिखे इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। छह साल का समय देखते देखते निकल जाता है और पता भी नहीं चलता।
मुझे भी नहीं पता चला था और चुनाव का समय आ गया। आपके समय में तो शायद जल्दी ही चुनाव हो जाए। इसलिए समय जाया न करें। उमर ने कहा कि प्रवक्ता की आड़ में ज्यादा दिनों तक टिका नहीं रहा जा सकता। मुख्यमंत्री को जनता के समक्ष आकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी कि क्या सही है और सरकार का स्टैंड क्या है।