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जम्मू-कश्मीर: परिसीमन पर नेशनल कांफ्रेंस का रुख बदला, पहले फारूक अब्दुल्ला ने कहा था- ये स्वीकार नहीं

Mon, 31 May 2021 10:35 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 31 May 2021 10:35 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया को नकारने वाली नेशनल कांफ्रेंस का रुख अब बदलता दिख रहा है। पार्टी के दिग्गज नेता इसे अवैध तक कह चुके हैं। वहीं पार्टी का एक धड़ा ऐसा भी है जो परिसीमन प्रक्रिया में शामिल होने पर बल दे रहा है।

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National Conference changed its stand on delimitation in Jammu and Kashmir
उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में परिसीमन का कई बार खुलकर विरोध करने और इसमें शामिल न होने के एलान के बाद आखिरकार नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) का रुख भी बदलने लगा है। बीते दिनों पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी(सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी। जिसके बाद नेकां ने परिसीमन प्रक्रिया का हिस्सा बनने से पूर्व इस पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। बता दें कि एक ओर फारूक अब्दुल्ला परिसीमन का खुलकर विरोध करते आ रहे हैं तो वहीं पार्टी का एक धड़ा इसका हिस्सा होने पर बल दे रहा है। प्रदेश में सियासी गतिविधियों को भांपते हुए यह धड़ा परिसीमन का हिस्सा होने पर विचार कर रहा है। पार्टी नेताओं की मांग के बाद नेकां प्रधान ने अब यह फैसला लिया है कि परिसीमन प्रक्रिया में शामिल होने से पहले समिति गठित का गठन होगा। 

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ज्ञात हो कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पुनर्गनठन हुआ है। जिसके तहत केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा के गठन से पूर्व परिसीमन किया जाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने छह मार्च, 2020 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया था। 
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परिसीमन प्रक्रिया पर फारूक अब्दुल्ला ने कही थी ये बात
बता दें कि परिसीमन आयोग की बैठक में शामिल न होने पर फारुक अब्दुल्ला कह चुके हैं कि पांच अगस्त 2019 को जो कुछ भी किया गया उसे हम स्वीकार नहीं करते हैं। यदि वह स्वीकार नहीं तो परिसीमन आयोग को कैसे स्वीकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने 2026 तक परिसीमन स्थगित किया था तो आखिर क्या कारण है कि पूरे देश की बजाय कुछ राज्यों को इसके लिए चुना गया। यदि पूरे देश में परिसीमन होता तो नेशनल कांफ्रेंस खुशी-खुशी इसका हिस्सा बनती लेकिन जानबूझकर जम्मू-कश्मीर को चुना गया। इस वजह से वे साथ नहीं हैं।
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हसनैन मसूदी परिसीमन प्रक्रिया को अवैध बता चुके हैं
नेकां के वरिष्ठ नेता हसनैन मसूदी परिसीमन प्रक्रिया को अवैध बता चुके हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को संविधान के प्रावधानों के खिलाफ बताया। आयोग की पहली बैठक में जम्मू-कश्मीर के सांसदों और अन्य संबंधित अधिकारियों से परिसीमन पर सुझाव और विचार लिए गए थे।

फारूक अब्दुल्ला को गुलाम नबी आजाद ने दिया था ये सुझाव

इसी साल फरवरी महीने में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने नेकां(नेशनल कांफ्रेंस) को परिसीमन आयोग की बैठक में शामिल होकर जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करने का सुझाव दिया था।आजाद ने कहा कि एक अच्छे संकेत के साथ नेकां सांसदों को परिसीमन आयोग की बैठक में प्रभावी ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। डॉ. फारूक अब्दुल्ला आयोग की बैठक का हिस्सा बनें। वह बैठक में शामिल न होकर भाजपा को फ्री हैंड दे रहे हैं।


 
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